पाकिस्तान के क्रिकेटर मोहम्मद रिजवान को साइबर क्राइम मामले में लाहौर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) के नोटिस को चुनौती देने वाली रिजवान की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें एजेंसी के नोटिस का जवाब देने को कहा है।
मामले में अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की अगली कार्रवाई NCCIA की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। एजेंसी रिजवान और इमाम-उल-हक के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर रही है। रिपोर्ट अगले सप्ताह PCB को सौंपे जाने की संभावना है।
होटल में पूछताछ के बाद लिया गया था फोन
रिजवान के वकील काजी उमैर अली ने अदालत में दावा किया कि लॉर्ड्स टेस्ट के बाद होटल में रिजवान से पूछताछ की गई थी। वकील के मुताबिक, उस दौरान उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और उनका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया गया।
वकील ने बताया कि रिजवान ने यह कहते हुए फोन सौंपा था कि उसे करीब तीन घंटे में वापस कर दिया जाएगा। हालांकि, बाद में फोन वापस नहीं किया गया।
जांच के अधिकार पर भी उठे सवाल
रिजवान की ओर से अदालत में NCCIA की जांच के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए गए। उनके वकील का कहना था कि क्रिकेट से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए ICC की एंटी-करप्शन यूनिट जिम्मेदार संस्था है।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले को ICC की एंटी-करप्शन यूनिट को नहीं सौंपा गया है। इसी आधार पर NCCIA के समन और जांच की प्रकृति को लेकर आपत्ति जताई गई।
कोर्ट ने नोटिस का जवाब देने को कहा
लाहौर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश आलिया नीलम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। अदालत ने रिजवान को NCCIA के नोटिस का जवाब देने की सलाह दी।
अदालत के फैसले के बाद अब मामले की दिशा NCCIA की फोरेंसिक जांच पर निर्भर मानी जा रही है।
रिपोर्ट के बाद PCB लेगा फैसला
NCCIA द्वारा दोनों खिलाड़ियों के मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। जांच में किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या अनियमितता सामने आती है या नहीं, यह रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।
PCB पहले जांच रिपोर्ट का अध्ययन करेगा और उसके बाद रिजवान तथा इमाम-उल-हक के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई पर फैसला लेगा। यदि जांच में कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आता है, तो दोनों खिलाड़ियों को राहत मिलने की संभावना बनी रहेगी।
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