मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद बनाए गए राहत शिविरों में मौतों के आंकड़ों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 8 जिलों के राहत शिविरों में दर्ज 640 मौतों का जिक्र करते हुए इनमें से 25 संदिग्ध मौतों की विस्तृत रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव से मांगी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बावजूद पोस्टमार्टम और आपराधिक जांच की स्थिति क्या है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 640 मामलों में केवल 20 का पोस्टमार्टम कराया गया है। कोर्ट ने संदिग्ध मौतों में उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष हुई। मामला 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की जांच और कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं से जुड़ा है।
कोर्ट ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को भी निर्देश दिया कि संदिग्ध मौतों के मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाए और जहां अपराध की आशंका हो वहां FIR दर्ज कराकर मौत के कारणों की उचित जांच सुनिश्चित की जाए।
3,020 मामलों की जांच जारी
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि 8 जिलों में 42 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें बनाई गई हैं। कुल 3,020 मामलों की जांच की जा रही है। इनमें 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। 1,135 मामलों की जांच अभी जारी है और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है।
पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने बताया कि गुवाहाटी की स्पेशल कोर्ट में मामलों की सुनवाई सप्ताह में केवल दो दिन हो रही है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि इससे भी ट्रायल आगे बढ़ेगा।
गीता मित्तल कमेटी की रिपोर्ट का भी जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से पूछा कि 4 जुलाई को समिति की ओर से मांगी गई जानकारी पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
3 मई 2023 से शुरू हुई थी हिंसा
मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और राहत शिविरों में रहना पड़ा। हिंसा के दौरान घरों, गांवों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचने तथा आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं।
अप्रैल 2023 में मणिपुर हाईकोर्ट की ओर से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग पर राज्य सरकार को विचार करने संबंधी निर्देश के बाद तनाव बढ़ा था। कुकी और अन्य आदिवासी संगठनों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद 3 मई को आदिवासी एकजुटता मार्च के दौरान कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी।
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