ऑपरेशन सिंदूर पर फारूक अब्दुल्ला का विवादित बयान: नौगाम ब्लास्ट केस में फिर गरमाई सियासत

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से कुछ नहीं निकला। उम्मीद है कि अब यह नहीं होगा। फारूक ने कहा- इसमें हमारे 18 लोग मारे गए। हमारी सीमाओं से समझौता किया गया। फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली धमाके पर कहा- हर कश्मीरी पर उंगलियां उठाई जा रही हैं। वो दिन कब आएगा जब वे मानेंगे कि हम हिंदुस्तानी हैं। हम इसके जिम्मेदार नहीं है। जो जिम्मेदार हैं, उनसे पूछिए कि इन डॉक्टरों को ये रास्ता क्यों अपनाना पड़ा? क्या वजह थी? इसकी गहन जांच और अध्ययन की जरूरत है। पूर्व CM ने श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में धमाके की घटना पर कहा- यह हमारी गलती है, जो लोग इस विस्फोटक को बेहतर समझते हैं, उन्हें हैंडल करना जानते हैं, हमें पहले उनसे बात करनी चाहिए थी। बजाय इसके कि खुद उन चीजों में दखल करें, जिसके बारे में पता नहीं है। आपने नतीजा देखा, 9 लोगों की जान चली गई। वहां घरों को कितना नुकसान हुआ।

आतंकी डॉक्टरों से जब्त विस्फोटक सैंपल लेते वक्त फटा, 9 की मौत: दिल्ली ब्लास्ट केस में हरियाणा के फरीदाबाद से जब्त किए गए 360 किलोग्राम विस्फोटक में 14 नवंबर देर रात कश्मीर के नौगाम थाने में धमाका हुआ था। उसमें 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 घायल हैं। इनमें 27 पुलिसकर्मी हैं। यह विस्फोटक पिछले हफ्ते फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर आतंकी डॉ. मुजम्मिल से जब्त किया गया था। थाने में रात 11:20 बजे जब फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम विस्फोटक पदार्थ से सैंपल ले रही थी, तभी ब्लास्ट हो गया। 15 नवंबर की सुबह मृतकों की पहचान हो सकी। इनमें 3 फोरेंसिक एक्सपर्ट, SIA के इंस्पेक्टर, नायब तहसीलदार, दो पुलिस फोटोग्राफर और तीन आम लोग शामिल हैं। धमाका इतना तेज था कि चीथड़े 100 मी. दूर तक गिरे। 800 मी. दूर तक खिड़कियां टूट गईं। थाना जर्जर हो गया। पुलिस और गृह मंत्रालय के अफसरों ने साफ किया है कि यह आतंकी हमला नहीं, हादसा था। विस्फोटकों में अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर था। इस मॉड्यूल की पहली एफआईआर नौगाम थाने में दर्ज हुई थी, इसलिए विस्फोटक 9-10 नवंबर की रात बैग्स में भरकर नौगाम थाने पहुंचाए गए थे।

दिल्ली ब्लास्ट केस में 3 डॉक्टर गिरफ्तार, हिरासत में कई : दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए बम धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी। ब्लास्ट का लिंक फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। यहां पढ़ाने वाला आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद नबी विस्फोटक वाली कार चला रहा था। ब्लास्ट में वह खुद भी मारा गया। डॉ. उमर कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला था। अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने वाले 2 डॉक्टर सहित तीन लोगों अब तक गिरफ्तार किया गया है। देशभर से करीब 15 डॉक्टर हिरासत में लिए जा चुके हैं। कई डॉक्टर आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने उन पर शिकंजा कसा है।

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