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“हेमंत सोरेन का बड़ा संकेत: ‘डराने-डिगाने की कोशिश न करें’, CM ने इशारों में किसे दी चेतावनी?”

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और बीजेपी के नजदीक आने की खबरें हाल तक मीडिया की सुर्खियों बनती रही है। अब भी रुक-रुक कर इसकी चर्चा हो रही है। इस बीच सीएम हेमंत सोरेन के एक बयान ने सबको चौंका दिया है। उन्होंने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कहा कि उन्हें न कोई डरा सकता है और डिगा सकता है। उन्होंने डराने और डिगाने वाले का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि उनका इशारा भाजपा की ओर था। भाजपा में भी प्रदेश नेताओं की ओर नहीं, बल्कि शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व की ओर था. जिस वक्त उन्होंने यह बात कही, उस समय भाजपा का कोई विधायक विधानसभा में मौजूद नहीं था। उन्होंने इस पर भी आश्चर्य जताया और कहा कि जिन्हें सरकार को आईना दिखाने के लिए सदन में मौजूद रहना चाहिए था, वे यहां हैं ही नहीं।

भाजपा के करीब जाने की रही है चर्चा

झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित समारोहों में भाग लेने के बाद हेमंत सोरेन पिछले दिनों सपत्नीक दिल्ली गए। वहां वे तीन-चार दिनों तक रहे। किस काम से गए थे, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी किसी को नहीं थी। इसलिए अनुमान के आधार पर खबरें मीडिया में तैरने लगीं। सारी खबरों का एक ही टोन और तथ्य था। तथ्य यह कि हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने भाजपा के एक शीर्ष नेता से मुलाकात की। मुलाकात का अर्थ यह निकाला गया कि झारखंड में सरकार के साझीदार बदल सकते हैं। मसलन जेएमएम अब कांग्रेस और आरजेडी को गठबंधन से बाहर करेगा और भाजपा के साथ हेमंत सोरेन सरकार बनाएंगे। आमतौर पर हेमंत सोरेन कहीं जाते हैं या किसी से मिलते हैं तो उनकी ओर से, सरकार या पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर की जाती हैं। हेमंत सोरेन की गोपनीय दिल्ली यात्रा के दौरान ऐसी कोई तस्वीर भी सामने नहीं आई। इसे हेमंत सोरेन का मौन मान कर अफवाहों पर उनकी स्वीकृति समझी गई।

सरकार के स्वरूप की भी हुई चर्चा

हेमंत सोरेन की ओर से भी कोई संकेत नहीं मिलने पर लोगों ने इसे सच मान लिया। हद तो तब हो गई, जब सरकार के स्वरूप का भी लोग अनुमान लगाने लगे। मसलन भाजपा के साथ सरकार बनेगी तो सीएम और डेप्युटी सीएम कौन बनेगा। भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को लोग हेमंत सोरेन की सरकार में डेप्युटी सीएम तक बताने लगे। बात कहां से निकली, इसके स्रोत तक जाने के बजाय झारखंड में मीडिया ने भी अफवाहों के आधार पर इसे हवा दी। हेमंत सोरेन दिल्ली से लौटे तो इसकी हवा निकल गई। कहीं से कोई संकेत उन्होंने नहीं दिया, जिससे इस अफवाह पर भरोसा किया जा सके। गुरुवार को असेंबली में जब हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर झारखंड की उपेक्षा का आरोप लगाया और डरने-डिगाने वाली बात कही, तब लोगों को अंदाजा हुआ कि अब तक की अफवाहों में कोई दम नहीं है।

क्या हैं हेमंत सोरेन के सामने मुश्किलें

दरअसल झारखंड की माली हालत इतनी खराब हो गई है कि हेमंत सोरेन को केंद्र के रहमोकरम पर रहना मजबूरी है। चुनाव जिताने वाली हेमंत की कुछ योजनाएं-घोषणाएं जमीन पर तो उतर गईं, लेकिन उसे जारी रखने में घोर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में जरूरी खर्चों के लिए करीब 16 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने की जानकारी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड सरकार का बकाया केंद्र सरकार नहीं दे रही है। इससे स्पष्ट है कि झारखंड सरकार भारी आर्थिक दबाव में है। हालत तो यह हो गई है कि ठेकेदारों ने विकास के सरकारी काम बंद कर दिए हैं। वे अपने बकाए की मांग कर रहे हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद विभागीय ठेकेदारों का छह महीने से बकाया रहने पर साफ कहते हैं कि अभी विभाग के पास पैसे नहीं हैं। इससे ही समझा जा सकता है कि झारखंड की माली हालत कैसी है।

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