नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष का सबसे बड़ा असर अब समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव ने न केवल वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, बल्कि समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा भी गंभीर संकट में डाल दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से अब तक खाड़ी क्षेत्र में विभिन्न घटनाओं में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन भारतीय अब भी लापता हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात पर पड़ रहा है। कई व्यापारिक जहाजों पर हमले, मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका तथा समुद्री मार्गों पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण हजारों नाविक भय और असुरक्षा के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक जिन भारतीयों की मौत हुई है, उनमें अधिकांश व्यापारी जहाजों पर कार्यरत समुद्री कर्मचारी थे। कई घटनाओं में जहाजों को निशाना बनाया गया, जबकि कुछ मामलों में सैन्य कार्रवाई के दौरान व्यापारी जहाज भी चपेट में आ गए। सरकार लापता भारतीयों की तलाश के लिए संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाते हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
शिपिंग कंपनियों ने कई जहाजों के मार्ग बदल दिए हैं, जबकि कुछ जहाजों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इससे माल ढुलाई की लागत में वृद्धि हुई है और बीमा प्रीमियम भी कई गुना बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका प्रत्यक्ष असर दिखाई देने लगा है। कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति और आयात-निर्यात लागत बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
भारतीय नौवहन क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक दुनिया भर के व्यापारी जहाजों पर कार्यरत हैं। समुद्री क्षेत्र में भारतीय कर्मचारियों की दक्षता और अनुभव के कारण उन्हें वैश्विक स्तर पर बड़ी संख्या में रोजगार मिलता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने हजारों भारतीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फारस की खाड़ी में संचालित सात भारतीय ध्वज वाले जहाज फिलहाल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुरक्षित रूप से संचालन कर रहे हैं और सभी जहाजों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में व्यापारी जहाजों के लिए खतरा पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है। युद्ध क्षेत्र के निकट होने के कारण कई बार व्यापारी जहाज भी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आ जाते हैं। आधुनिक ड्रोन, मिसाइल और समुद्री निगरानी प्रणालियों के बीच सामान्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) सहित कई वैश्विक संस्थाओं ने समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि व्यापारी जहाजों और उन पर कार्यरत कर्मचारियों को किसी भी सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित रखा जाना चाहिए तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पूरी तरह पालन किया जाना आवश्यक है।
भारत सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय, नौवहन मंत्रालय तथा भारतीय दूतावास प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों और समुद्री कर्मचारियों से संपर्क बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने और सुरक्षित निकासी के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, परिवहन लागत, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई है। समुद्र में कार्यरत हजारों भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि यह संघर्ष जल्द समाप्त हो और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग एक बार फिर पूरी तरह सुरक्षित हो सकें। वहीं भारत सरकार लापता भारतीयों की खोज, मृतकों के परिजनों को सहायता तथा समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
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