नई दिल्ली। दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में यासीन मलिक समेत 7 आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत के मुताबिक, रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार और मजबूत संदेह बनता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि आरोपियों तक पाकिस्तान और अन्य आतंकी संगठनों से हवाला तथा दूसरे माध्यमों के जरिए करीब ₹8.94 करोड़ की रकम पहुंचाई गई। एजेंसी ने इसी कथित अपराध से अर्जित धन की जांच के लिए 14 जून 2017 को शिकायत दर्ज की थी।
मामले में यासीन मलिक के अलावा जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल राशिद शेख, शबीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट आरोपी हैं।
विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज मिलने का दावा
ED के अनुसार, जहूर अहमद शाह वटाली के परिसरों से जब्त किए गए दस्तावेजों में कथित विदेशी फंडिंग से संबंधित जानकारी मिली थी। जांच एजेंसी का दावा है कि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान वटाली के माध्यम से यासीन मलिक, शबीर अहमद शाह और मसरत आलम तक विदेशी रकम पहुंची।
कोर्ट के सामने NIA की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट का भी उल्लेख किया गया। इसमें यासीन मलिक को सऊदी अरब से ₹15.75 लाख मिलने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण मुकदमे की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
30 सितंबर को सुरक्षा कारणों से कुछ आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका। मामले में अब अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। अदालत में PMLA के तहत आरोप तय किए जाने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यासीन मलिक को 2022 में मिली थी उम्रकैद
यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से जुड़ा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह 1980 के दशक के आखिर में संगठन से जुड़ा और 1990 के आसपास जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गतिविधियों के दौरान संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल था।
1994 में उसने हथियार छोड़ने की घोषणा की और इसके बाद अलगाववादी राजनीति में सक्रिय रहा। केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में JKLF पर UAPA के तहत प्रतिबंध लगाया था।
मई 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है।
नोट: अदालत द्वारा आरोप तय करने का आदेश मुकदमे में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
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