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सरकार के नाक के नीचे दरी फैक्ट्री में करोड़ों की वेतन चोरी

– अखिर क्यों मजदूरों को दावत के एक निवाले से भी रखा दूर
अटरिया, सीतापुर। सिधौली कोतवाली क्षेत्र से एक संगठित श्रम शोषण रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने प्रदेश की औद्योगिक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला मधु इंडिया डेको लिमिटेड दरी फैक्ट्री (हीरपुर इकाई) से जुड़ा है, जहाँ सैकड़ों गरीब श्रमिकों की मेहनत की कमाई पर व्यवस्थित तरीके से डाका डालने और उनके साथ खुलेआम भेदभाव करने का आरोप लगा है।
फैक्ट्री प्रशासन पर श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन का सबसे बड़ा आरोप वेतन चोरी का है। कागजों पर श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 615 दर्ज है, लेकिन उन्हें वास्तविक भुगतान केवल 205 नकद किया जा रहा है। यानी दो-तिहाई से अधिक की सीधी चोरी। मशीन कारीगरों के साथ भी धोखारू मशीन कारीगरों को भी रिकॉर्ड में दर्ज 800 की जगह मात्र 340 का भुगतान किया जा रहा है। करोड़ों की मजदूरी चोरी को छिपाने के लिए श्रमिकों को बैंक खातों की जगह केवल नकद भुगतान किया जाता है, और उन्हें आईडी कार्ड भी नहीं दिए जाते, ताकि वास्तविक पहचान और संख्या छिपाई जा सके। बीते दिन फैक्ट्री में हुए भव्य भोजन दावत कार्यक्रम ने फैक्ट्री प्रशासन के दोहरे मापदंड को उजागर कर दिया। कार्यक्रम में कई बड़ी हस्तियां और मधु इंडिया डेको लिमिटेड की मालकिन मधु गुप्ता भी मौजूद थीं। फैक्ट्री प्रशासन ने लाखों रुपए खर्च किए इस भव्य कार्यक्रम में मजदूरों को एक निवाला भी खिलाने से परहेज किया। आश्चर्य की बात यह है कि फैक्ट्री के किसी भी मजदूर को कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश तक नहीं दिया गया। फैक्ट्री प्रशासन द्वारा कभी भी किसी कार्यक्रम में मजदूरों को प्रवेश नहीं दिया जाता और उनके साथ भेदभाव किया जाता रहा है। जिस दिन फंक्शन होता है, उच्च अधिकारियों के मित्र, रिश्तेदार और मोहल्ले वाले एक साथ मिलकर महंगे पकवानों का लुफ्त उठाते हैं, जबकि मजदूरों को छुट्टी दे दी जाती है। 24 घंटे चलने वाली इस फैक्ट्री में स्टाफ के लिए अलग स्टाफ मिस है, वहीं श्रमिकों को बेहद खराब और घटिया क्वालिटी का भोजन लेबर मिस में दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार, बीते कई वर्षों में मधु इंडिया डेको लिमिटेड द्वारा बार-बार नाम बदलने के पीछे एक बड़ा राजश्और करोड़ों की मजदूरी चोरी को श्रम विभाग की नजरों से छिपाने की साजिश हो सकती है। दो तरह के श्फॉर्म-12 फैक्ट्री प्रशासन श्रम विभाग को गुमराह करने के लिए दो तरह के फॉर्म 12 का इस्तेमाल कर रहा है। मजदूरों की 15 दिन की हाजिरी को रिकॉर्ड्स में चालाकी से केवल 6 से 7 दिन ही दर्शाया जाता है। इस अटेंडेंस हेराफेरी का सीधा असर उनके पीएफ और भविष्य निधि जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों पर पड़ रहा है। इतने व्यापक स्तर पर श्रमिकों का शोषण, प्रदेश सरकार और संबंधित श्रम विभाग की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मजदूर संगठनों ने सरकार से तत्काल इस श्रम लूट की उच्च-स्तरीय जाँच करने और फैक्ट्री के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है ताकि गरीब श्रमिकों को उनका मेहनताना और हक मिल सके।

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