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“SIR पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी परीक्षा आज: ‘नागरिकता जांच है, देश निकाला नहीं’ चुनाव आयोग की दलील”

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले पर सुनवाई होगी। बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए थे। पिछली सुनवाई 13 जनवरी को हुई थी। चुनाव आयोग की ओर से सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। उन्होंने साफ किया कि SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। द्विवेदी ने संविधान सभा की बहसों और सरबानंद सोनोवाल केस का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकता की जांच जरूरी है।

SIR पर पिछली मुख्य 3 सुनवाई…

6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा-वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना हमारा काम

चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है।

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