न्यूज़ वाणी ब्यूरो, बांदा। बांदा जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विद्युत सखी बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर बिजली बिल जमा कराने का काम कर रहीं 112 विद्युत सखियां अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। इस पहल से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है, वहीं बिजली विभाग को बकाया राजस्व की वसूली में भी मदद मिल रही है।
विद्युत बिल जमा कराकर हर महीने हो रही 10 से 12 हजार रुपये की कमाई
बिसंडा क्षेत्र के कुर्रा खुर्द गांव की निवासी अंजू मौर्या विद्युत सखी के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से वह इस योजना से जुड़ी थीं और वर्ष 2022 से उन्होंने काम शुरू किया। बिजली बिल जमा कराने पर उन्हें बिल की राशि के अनुसार कमीशन मिलता है। उन्होंने बताया कि करीब 2,000 रुपये के बिजली बिल पर 19 रुपये कमीशन मिलता है, जबकि अधिक राशि के बिल पर कमीशन भी बढ़ जाता है। कुल बिल का लगभग एक प्रतिशत कमीशन मिलने से उनकी मासिक आमदनी करीब 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इससे परिवार के खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
बिजली विभाग के राजस्व में भी मिल रही मदद
विद्युत सखियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बकाया बिजली बिलों की वसूली आसान हो रही है। गांवों में उपभोक्ताओं के घर तक पहुंचकर बिल जमा कराने की सुविधा मिलने से लोगों को बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इससे समय की बचत होती है और बकाया बिलों का भुगतान करने में भी सहूलियत मिलती है।
घर बैठे बिल जमा करने की सुविधा से उपभोक्ताओं को राहत
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता रविकांत ने विद्युत सखियों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि बकाया बिजली बिलों की वसूली में उनसे काफी मदद मिल रही है। दूरदराज के ग्रामीण उपभोक्ता भी अपने घर के दरवाजे पर बिजली बिल जमा कर पा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को सुविधा मिलती है और विभाग को राजस्व संग्रह में सहायता प्राप्त होती है।
बांदा में विद्युत सखियों की पहल महिला स्वावलंबन और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ बिजली बिल भुगतान की व्यवस्था को भी आसान बना रही है।
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