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”जिसे देखने की चाह में तड़पता रहा जेल में: बाहर आकर उसी पत्नी की ले ली जान, जानें पूरा मामला”

 सेशन कोर्ट ने मोहम्‍मद नसीम खलील अंसारी को अपनी पत्नी यास्मीन बानो की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी पर आरोप था कि उसकी पत्नी जेल में उससे मिलने नहीं आती थी। हत्या उसी दिन हुई, जब वह जेल से रिहा हुआ था।

अतिरिक्त लोक अभियोजक रमेश सिरोया के अनुसार, अंसारी को 2019 में चोरी के मामले में जेल हुई थी। जेल से रिहा होने के बाद 26 फरवरी 2020 को सुबह घर लौटे। घर पहुंचने पर उसकी पत्नी यास्मीन बानो से कहासुनी हो गई और गुस्से में अंसारी ने उसे जेल में मिलने न आने का आरोप लगाना शुरू किया। जब पड़ोसी ने बीच-बचाव किया, तो अंसारी ने उसे “अपने काम से काम रखो” कहते हुए घर से बाहर चला गया।

पत्नी और पड़ोसी पर हमला: पुलिस के सामने खुला सच

पुलिस के अनुसार, अंसारी उसी रात घर लौटकर पत्नी पर मारपीट करने लगा। जान बचाने के लिए जब पत्नी घर से बाहर भागी, अंसारी ने उसका पीछा किया। इस दौरान गलती से पड़ोसी का बच्चा कुचल गया। पड़ोसी ने आपत्ति जताई, लेकिन आरोपी ने धमकाना शुरू कर दिया। इसके बाद पड़ोसी रिपोर्ट दर्ज कराने थाने गया। इसी बीच, अंसारी ने पत्नी को बाल पकड़कर घसीटा और उसके पेट में दो बार लात मारी जिससे वह जमीन पर गिर गई। इसके बाद अंसारी ने उस पर पत्थर से हमला किया और मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद सेवरी पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया गया।

अदालत में दलील और खारिज

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. आर. नवंदर ने कहा कि आरोपी ने दावा किया कि उसकी पत्नी को चोटें सड़क दुर्घटना में लगी थीं और घटना के समय वह घर पर मौजूद था। जब उसे इसकी जानकारी मिली तो वह तुरंत मौके पर पहुंचा। वहां से अन्य लोगों के साथ मिलकर उसने मृतका को अस्पताल पहुंचाया, जहां से पुलिस उसे थाने ले गई। हालांकि, अदालत ने यह दलील खारिज कर दी। प्रत्यक्षदर्शी पड़ोसी की गवाही और चिकित्सकीय साक्ष्य ने साबित किया कि यह हत्या का मामला था।

अंसारी ने दावा किया था कि प्रत्यक्षदर्शी पड़ोसी, जिसने बीच-बचाव की कोशिश की थी, पुलिस द्वारा अक्सर गवाह के रूप में पेश किए जाने वाले व्यक्ति हैं और उनका उसके साथ पिछला विवाद भी रहा है। हालांकि, अदालत ने कहा कि पड़ोसी के खिलाफ झूठा आरोप लगाने का अंसारी के पास कोई कारण नहीं था। अदालत ने यास्मीन बानो द्वारा प्राप्त चोटों की प्रकृति पर आधारित चिकित्सकीय साक्ष्यों को भी भरोसेमंद माना।

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