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अमर रहे गणतंत्र यह भारत का शुभ पर्व, संप्रभुता-सम्मान का लोकतंत्र का गर्व

– शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी आयोजित
– काव्य गोष्ठी में भाग लेते कवि एवं साहित्यकार।
फतेहपुर। शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 421 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन केपी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए केपी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना में अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां आइए, करो दुखों का अंत हरी-भरी धरती करो, बगरे सरस बसंत।। पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- अमर रहे गणतंत्र यह भारत का शुभ पर्व। संप्रभुता-सम्मान का, लोकतंत्र का गर्व।। डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया- अरे ओ मानवता के दूत, दिखाई पड़ते क्यों यों खिन्न। कर्म में ही नर का अधिकार, कर्म से हुए आज क्यों भिन्न।। राम अवतार गुप्ताने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- गर्व करें गणतंत्र पर, जो भारत की शान। संविधान का देश में, सर्वश्रेष्ठ स्थान।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये- स्वाभिमान, सम्मान, सुरक्षा संविधान का है संदेश। समानता, सद्भाव, समन्वय- शक्ति समाहित भारत देश।। डॉ शिवसागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए- विपति काल में धैर्य ही, आता सबके काम। धीरज से ही प्रभु बने, राजकुंवर श्री राम।। उमाकांत मिश्र ने पढ़ा- सपने दिखाते आश्वासनों के बड़े-बड़े, इनका हकीकतों से मेल नहीं मिलता। मात दे दें अच्छे-अच्छे माहिर मदारियों को, राजनीति जैसा कोई खेल नहीं मिलता।। अनिल कुमार मिश्र ने पढ़ा- न उसका था, न मेरा है। फकत लालच का घेरा है।। सभी कुछ छूट जाना है। नहीं फिर लौट आना है।। रवींद्र कुमार तिवारी ने पढ़ा- सबसे सुंदर विश्व में, है अपना गणतंत्र। न्याय, शांति, सद्भावना, है विकास का मंत्र।। काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक मुक्तक के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किये- यह आज़ादी जो हमें मिली, है वीर शहीदों की थाती। इसको संभाल रखने के हित, चाहिए वज्र जैसी छाती।। आगे पुनः पढ़ा-भारत का स्वाभिमान है छब्बीस जनवरी। गणतंत्र का वरदान है छब्बीस जनवरी।। जिस संविधान पर सदा करते हैं नाज हम, उसके लिए दिनमान है छब्बीस जनवरी।। कार्यक्रम के अंत में पुजारी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजक ने आभार व्यक्त किया।

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