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कन्नौज जेल से फिल्मी फरारी — चादरों से रस्सी बनाकर 2 कैदी दीवार फांदकर भागे

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिला कारागार से प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां से दो कैदी चादरों की रस्सी बनकर फरार हो गए और जेल की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों को पता तक नहीं चला. इस घटना से पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है. पुलिस ने दोनों कैदियों की तलाश शुरू कर दी है. फरार कैदियों में से एक चोरी के केस में बंद था, जबकि दूसरा पॉक्सो एक्ट जैसे आरोपों में जेल में था.जानकारी के अनुसार, कन्नौज के अनौगी क्षेत्र स्थित जिला कारागार में बंद दो कैदियों ने पहले तो जेल की सुरक्षा व्यवस्था में घात लगाते हुए फिल्मी अंदाज में फरार होने की योजना बनाई और फिर उसे अंजाम दिया. हालांकि, इस बीच पुलिस को उनकी योजना के बारे में कुछ भी पता नहीं चला. फरार एक कैदी की पहचान अंकित पुत्र प्रेमचन्द के तौर पर हुई है, जो कि जिले के ही तालग्राम हजरापुर का रहने वाला है. वह चोरी के मुकदमे में जेल में बंद था.

पॉक्सो एक्ट में बंद था एक फरार कैदी

वहीं, दूसरे फरार कैदी की पहचान डिंपी उर्फ शिवा पुत्र चमनलाल के तौर पर हुई है. डिंपी जिले के ही ठठिया थाना क्षेत्र के मलगवा का रहने वाला है. वह पॉक्सो एक्ट के मामले में बंद था. बताया जा रहा है कि दोनों कैदियों ने जेल प्रशासन की तरफ से दी जाने वाली चादरों को जोड़कर एक मजबूत रस्सी तैयार की थी. इसके बाद दोनों ने इसी रस्सी के सहारे जेल की ऊंची दीवार फांद ली और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए.

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया. जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और पुलिस अधीक्षक तत्काल जिला कारागार पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया. जिलाधिकारी ने बताया कि जेल से दो कैदियों के फरार होने की सूचना मिली थी. तुरंत टीमें गठित कर दी गई हैं और फरार कैदियों की तलाश के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है.

फरार कैदियों की तलाश में जुटी पुलिस

इस प्रकरण में लापरवाह अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी. वहीं पुलिस अधीक्षक ने भी जेल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जांच बढ़ा दी है. जिले की सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है. साथ ही फरार कैदियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि फरार कैदियों के बारे में कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस को जानकारी दें.

इस घटना ने एक बार फिर जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन फरार कैदियों को कितनी जल्दी गिरफ्तार कर पाता है और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है.

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