हसवा, फतेहपुर। आधुनिकता की दौड़ में जहां लोक परंपराएं और ग्रामीण संस्कृति के पारंपरिक आयोजन धीरे-धीरे सिमटते जा रहे हैं, वहीं हसवा विकासखंड के सातों धरमपुर गांव में आल्हा गायन ने बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी को अपनी ओर खींच लिया। स्व. रामेश्वर सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की स्मृति में चौहान सदन परिसर में लगातार 10वें वर्ष एक दिवसीय आल्हा गायन कार्यक्रम आयोजित हुआ। वीर रस से ओतप्रोत आल्हा की गूंज से पूरा गांव देर रात तक गूंजता रहा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय आल्हा मंडल की टीवी एवं रेडियो गायिका काजल सिंह ने अपनी गायकी से समां बांध दिया। उन्होंने सबसे पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रामेश्वर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जब तक सूरज-चांद रहेगा, बाबा रामेश्वर सिंह का नाम अमर रहेगा।
इसके बाद माहोबा गढ़ की लड़ाई का प्रसंग छेड़ते हुए उन्होंने “खट-खट तेगा बाजे, बाजे छन-छन तलवार” जैसे वीर रस से भरपूर आल्हा का गायन किया। प्रस्तुति सुनकर श्रोता रोमांचित हो उठे। आल्हा गायिका ने अपनी प्रस्तुति के दौरान सातों धरमपुर की खुशहाली और मां सरस्वती के आशीर्वाद की कामना भी की।
आल्हा गायन सुनने के लिए सातों सुल्तानपुर, सातों पीत समेत आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। देर रात तक चले कार्यक्रम में लोगों ने लोकगायन का आनंद लिया।
पूर्व प्रधान विष्णु सिंह ने राष्ट्रीय आल्हा मंडल की टीवी एवं रेडियो सिंगर काजल सिंह को शॉल और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि अपने पिता स्व. रामेश्वर सिंह की स्मृति में पिछले दस वर्षों से लगातार आल्हा गायन का आयोजन कराया जा रहा है। क्षेत्र के बुजुर्गों और लोक संस्कृति प्रेमियों में आज भी आल्हा गायन को लेकर खास उत्साह देखने को मिलता है।
कार्यक्रम में आदित्य सिंह, राजा द्विवेदी, मिर्चइया सिंह, नन्नूबूद महाराज, अखिलेश सिंह, नीलू सिंह, दुर्गेश सिंह चंदेल, पूर्व प्रधान राममनोहर, धर्मेंद्र कुमार सिंह, केशन पासवान, पवन सविता, गया पाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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