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कलवा मुंब्रा गोटेघर वन विभाग में कथित अवैध वसूली का मामला, तीन अधिकारी पर भी गंभीर आरोप।

संवाददाता: सैयद समीर हुसैन

मुंब्रा / ठाणे कलवा–मुंब्रा–गोटेघर क्षेत्र में वन विभाग को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वन विभाग के कुछ अधिकारी वर्षों से भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत कर वन भूमि पर अवैध निर्माण और कथित वसूली का खेल चला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पूर्व आरएफओ दिनेश देसाले पर वन विभाग की जमीनें बेचने और अवैध वसूली कराने के आरोप लगते रहे हैं। यह भी आरोप है कि उनके निर्देश पर तत्कालीन वन अधिकारी प्रदीप कामड़ी द्वारा लाखों रुपये की वसूली की जाती थी। मामला सार्वजनिक होने के बाद कथित तौर पर खुद को बचाने के लिए देसाले ने उस समय के वन अधिकारी अनिल भांबरे को निलंबित कर दिया। इसके बाद क्षेत्र में नए वन अधिकारी के रूप में संदीप सीताराम मोरे की नियुक्ति हुई। शुरुआती दौर में उन्होंने खुद को ईमानदार अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनके कार्यकाल में भी कथित अवैध वसूली का सिलसिला जारी रहा। सूत्र बताते हैं कि यह स्थिति दिनेश देसाले को नागवार गुज़री, जिसके बाद उनके कथित करीबी प्रदीप कामड़ी के माध्यम से संदीप मोरे की गतिविधियों पर नज़र रखी जाने लगी। आरोप यह भी हैं कि मोरे ने खुद को ईमानदार और अन्य अधिकारियों को भ्रष्ट बताकर एक साजिश के तहत देसाले और कामड़ी का तबादला करवाया, जिससे क्षेत्र में उनका प्रभाव बढ़ गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संदीप मोरे के कार्यक्षेत्र में कार्यरत दो अन्य अधिकारी—तुषार कलुखे और कृष्णा पोले—भी वर्षों से अपने-अपने क्षेत्रों में कथित भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।आरोप है कि तुषार कलुखे के क्षेत्र कलवा पूर्व में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिन पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होती और केवल आश्वासन दिए जाते हैं। वहीं शील-डायघर, पिंपरी, दहिसर मोरे, ठाकुर पाड़ा इलाकों में कृष्णा पोले के क्षेत्र में अवैध निर्माण, भट्टियां और गालों के संचालन के आरोप लगाए जा रहे हैं और ये बात यूंही नहीं बताई जा रही है,इन तमाम इलाकों में आर एफ ओ नरेंद्र मुठे सर्वे कर सकते है,दूध का दूध,पानी का पानी हो जाएगा,सूत्रों का दावा है कि इन तीनों अधिकारियों की मिली भगत से वन विभाग की कई जमीनों पर अवैध निर्माण हुए हैं, लेकिन विभाग के आला अधिकारियों की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों की मांग है कि इन अधिकारियों को मुंब्रा–कलवा क्षेत्र से तत्काल हटाया जाए और पिछले वर्षों में हुए अवैध निर्माणों व कथित वसूली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इस बीच, देसाले के स्थान पर नरेंद्र मुठे को दोबारा ठाणे जिले का आरएफओ नियुक्त किया गया है। जनता को उनसे निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है। हालांकि आरोप है कि संदीप मोरे अब भी आला अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि मोरे के खिलाफ कई लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अब दस्तावेज़ी सबूत एकत्र किए जा चुके हैं और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल, जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब तीनों अधिकारियों के द्वार हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने का मौका आगया है,

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