होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर के समुद्री माइन से टकराने के बाद जहाज में जोरदार धमाका हुआ और आग लग गई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने शनिवार को इस घटना की जानकारी दी। हालांकि, अभी तक जहाज की पहचान और उसके संबंधित देश के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब खाड़ी क्षेत्र में समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 28 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) तथा तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जाने वाले टैंकरों से जुड़ी 13 घटनाएं दर्ज की गईं।
जहाज के नेविगेशन सिस्टम बंद होने का आरोप
ईरान ने आरोप लगाया कि संबंधित जहाज ने अपने नेविगेशन और लोकेशन सिस्टम बंद कर रखे थे। ईरानी पक्ष के मुताबिक, जहाज प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने भी क्षेत्र में जारी गतिविधियों पर चिंता जताई। उसके अनुसार, इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि ईरान समुद्री मार्गों पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर दबाव कायम रखना चाहता है।
व्यापारिक जहाज पर हमले में 11 भारतीय घायल
होर्मुज क्षेत्र में इससे पहले 6 अक्टूबर को ओमान के पास पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज एमटी ऑन पीस पर हमला हुआ था। भारत ने इस घटना की निंदा की थी। हमले में जहाज के 12 क्रू मेंबर घायल हुए थे, जिनमें 11 भारतीय नागरिक शामिल थे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले के समय जहाज ओमान के तट के पास से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 19 लोग सवार थे, जिनमें 17 भारतीय नागरिक थे। ओमानी अधिकारियों की सहायता से घायलों को निकालकर खासाब में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी से अब तक होर्मुज क्षेत्र में हुए हमलों से 100 से अधिक भारतीय नाविक प्रभावित हो चुके हैं, जबकि 11 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं ने समुद्री परिवहन में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
खाड़ी क्षेत्र में 4,500 से ज्यादा भारतीय नाविक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 29 सितंबर को बताया था कि फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्र में विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में भारत के झंडे वाले छह वाणिज्यिक जहाज मौजूद थे। इसके अतिरिक्त, छह विदेशी झंडे वाले जहाज भी भारत के लिए सामान लेकर जा रहे थे। इन 12 जहाजों पर लगभग 163 भारतीय नाविक सवार थे।
भारतीय शिपिंग मंत्रालय संबंधित जहाजों की आवाजाही पर नजर रख रहा है। भारतीय दूतावास और स्थानीय एजेंसियां भी नाविकों की स्थिति तथा सुरक्षा की निगरानी कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर भारतीय मिशनों के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और काला सागर में जहाजों तथा नाविकों पर हो रहे हमलों को अस्वीकार्य बताया था।
भारत ने समुद्री मार्गों पर हिंसा रोकने, तनाव कम करने और सभी देशों से संयम बरतने की अपील की थी। भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना जरूरी है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव, समुद्री हमला या आवाजाही में बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच जहाजों की सुरक्षा, भारतीय नाविकों की निगरानी और समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखना प्रमुख चुनौती बन गया है।
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