नेपाल में लगातार बारिश और बाढ़ के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए बिहार के गंडक बैराज को तीन बार खोलकर भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। बैराज से हर सेकेंड करीब 79.3 लाख लीटर पानी निकल रहा है, जिससे नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
बाढ़ के तेज बहाव के कारण नदी में आसपास के इलाकों से सामान भी बहकर आने लगा है। पानी के साथ भैंस और फ्रिज समेत कई घरेलू वस्तुएं बहकर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे के क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया है।
गंडक नदी में पानी का प्रवाह बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। जलस्तर और बैराज से छोड़े जा रहे पानी की लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। नदी किनारे बसे गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए नावों और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल सकता है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे, पुलों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। प्रशासन ने ग्रामीणों को अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी है।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, जबकि पशुपालकों को अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी संभावित जलजनित बीमारियों से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने पर गंडक नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अगले कुछ घंटों तक विशेष सावधानी बरतने और आपात स्थिति में स्थानीय नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की अपील की है।
प्रशासन ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों की टीमें गांवों में जाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और जरूरी दस्तावेज, दवाइयां, पीने का पानी तथा मोबाइल फोन साथ रखने की सलाह दे रही हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जा रही है।
बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि जलस्तर में बदलाव मौसम और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगा। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी में नहाने, मछली पकड़ने या जलभराव वाले रास्तों से गुजरने का जोखिम न उठाएं।
कई स्थानों पर ग्रामीणों ने प्रशासन से अतिरिक्त नावों, लाइफ जैकेट और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। स्थानीय स्वयंसेवक भी बचाव दलों के साथ मिलकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। बिजली विभाग को जलभराव वाले इलाकों में सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने का अनुमान जताया गया है। इसके चलते नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और रात के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि स्थिति बिगड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा और किसी भी आपात सूचना को नियंत्रण कक्ष तक तुरंत पहुंचाया जाए।
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