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जैविक खेती के लिए पशुपालन जरूरी

– स्वस्थ्य रहने के लिए जहरमुक्त उत्पादन की जरूरत
– जैविक कृषि मेला को संबोधित करते वक्ता।
चौडग़रा, फतेहपुर। मलवां विकास खंड के लहंगी गांव में नमामि गंगे योजना के तहत जैविक कृषि मेला का आयोजन शुक्रवार को उप जिला कृषि निदेशक सत्येंद्र सिंह के निर्देशन में कृषि विभाग की सर्विस प्रोवाइडर ईश एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड इंदौर मध्य प्रदेश के द्वारा आयोजित किया गया। मेले का शुभारंभ फीता काटकर सेवानिवृत संयुक्त कृषि निदेशक डा. ओपी वर्मा एवं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुरेश निषाद ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन आलोक गौड़ ने किया। कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव के पशु वैज्ञानिक डा. संजय पांडेय ने कहा कि बिना पशुपालन के जैविक खेती की कल्पना नहीं की जा सकती। पशुपालन घर की खेती होती है। पशुओं में बांझपन, खुरपका, मुंहपका, थनैला बीमारी से बचाव के लिए घरेलू उपचार बताए। मौसम वैज्ञानिक वसीम खान ने किसानों को खेती में बुवाई, बीजशोधन, जीवामृत के छिड़काव के लिए उचित समय की जानकारी देकर टोल फ्री नंबर बताए। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक वीरेंद्र यादव, रमाकांत तिवारी ने जीवामृत बनाने और खेती में उपयोग का सजीव प्रदर्शन कर किसानों को अपनी खाद, अपने बीज उपयोग की जानकारी दी। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी प्रेमदान पाल ने मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए मृदा जांच के तरीके बताए। उन्होंने कहा नाडेप कंपोस्ट के लिए गड्ढा बनाकर गोबर इकट्ठा करे सड़क और पक्की जगह पर गोबर न डाले। बताया कि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के कारण उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है। गोबर की अच्छी खाद से ही पंद्रह पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। औषधीय खेती के लिए अमित श्रीवास्तव ने कालमेघ, एलोवेरा, फूलों की खेती के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर भृगु जैविक उत्पादों के स्टॉल लगाए गए। प्रमुख रूप से ईश एग्रीटेक के प्रोजेक्ट क्वार्डिनेटर जितेंद्र सिंह, अनिल मिश्रा, आशीष, ऋषि, धीरज, अखिलेश कुमार, विवेक, शिवराज सिंह, मुरारी, सुरेन्द्र सिंह, सुरेश आदि रहे।

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