संभल। उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट करीब एक वर्ष पहले ही सरकार को सौंप दी थी, लेकिन अब विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पेश किए जाने का उद्देश्य चुनावी माहौल तैयार करना है।
सांसद बर्क ने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि विधानसभा में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट में वास्तविक घटनाओं और पीड़ितों के साथ हुए कथित अन्याय को स्थान नहीं दिया गया, तो वह इसके खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करेंगे।
“एक साल पहले सरकार को मिल चुकी थी रिपोर्ट”
मीडिया से बातचीत के दौरान जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि संभल हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट काफी पहले सरकार को सौंप दी थी। उनके अनुसार, यदि सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहती थी तो इसे पहले भी विधानसभा के सामने रखा जा सकता था।उन्होंने सवाल उठाया कि रिपोर्ट को लंबे समय तक रोके रखने के बाद अब मानसून सत्र में पेश करने का फैसला क्यों लिया गया। उनका आरोप था कि सरकार इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक चर्चा का विषय बनाकर आगामी चुनावों के मद्देनजर माहौल तैयार करना चाहती है।
रिपोर्ट की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
सपा सांसद ने कहा कि उन्हें जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार विधानसभा में पेश की जाने वाली रिपोर्ट वास्तविक घटनाओं का सही चित्रण नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में एक पक्ष की बात को प्रमुखता दी गई है, जबकि दूसरे पक्ष के साथ हुई कथित ज्यादतियों को नजरअंदाज कर दिया गया है।बर्क ने कहा कि किसी भी न्यायिक जांच का उद्देश्य निष्पक्षता और तथ्य सामने लाना होना चाहिए। यदि रिपोर्ट में सभी पक्षों को समान रूप से नहीं सुना गया है, तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
“हमारे ऊपर हुए जुल्म को नहीं दिखाया गया”
जियाउर्रहमान बर्क ने दावा किया कि रिपोर्ट में उन लोगों के साथ हुई कथित घटनाओं और कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया, जिन्हें उनके अनुसार नुकसान उठाना पड़ा।उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट में वास्तविक तथ्यों को शामिल नहीं किया गया और पीड़ित पक्ष की बात को उचित स्थान नहीं मिला, तो यह न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद उसका कानूनी अध्ययन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अदालत में चुनौती दी जाएगी।
हाई कोर्ट जाने की चेतावनी
सपा सांसद ने स्पष्ट कहा कि यदि रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटियां पाई जाती हैं या उनके अनुसार वास्तविक घटनाओं को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया है, तो वे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा है और यदि किसी भी स्तर पर निष्पक्षता प्रभावित हुई है तो अदालत से उचित राहत मांगी जाएगी। उनका कहना था कि रिपोर्ट के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
संभल हिंसा से जुड़ी न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर सपा सांसद के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में रिपोर्ट पेश होने के बाद इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। साथ ही रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकते हैं।
रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें विधानसभा में पेश होने वाली न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयोग ने किन तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर अपनी सिफारिशें दी हैं।यदि रिपोर्ट को लेकर उठाए गए सवालों पर विवाद गहराता है, तो मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ सकता है। फिलहाल सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ, तो वे न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेंगे।
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