पेरिस, फ्रांस। फ्रांस में सोमवार को सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर हुए बड़े साइबर हमले ने खाद्य सुरक्षा और कारोबार को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी। इस हमले से 480 से अधिक दुकानों के फ्रिज और फ्रीजर प्रभावित हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ उपकरणों का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे बड़ी मात्रा में ताजा और फ्रोजन खाद्य पदार्थ खराब होने की आशंका है। कई दुकानों में आग लगने की भी खबर सामने आई है।
हैकर्स ने फ्रिज और फ्रीजर के सिस्टम को बनाया निशाना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर हमलावरों ने सुपरमार्केट में लगे रेफ्रिजरेशन सिस्टम की सेटिंग बदलकर उन्हें डीफ्रॉस्टिंग मोड में डाल दिया। इस प्रक्रिया में फ्रिज और फ्रीजर के भीतर जमी बर्फ पिघलने लगती है और तापमान बढ़ सकता है। इससे खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने वाली कोल्ड चेन प्रभावित हुई।
सुपरमार्केट में रेफ्रिजरेशन सिस्टम को अक्सर डिजिटल कंट्रोल पैनल के माध्यम से संचालित किया जाता है। इंटरनेट से जुड़े इन उपकरणों की निगरानी और रखरखाव दूर बैठकर भी किया जा सकता है। यदि हमलावर सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद किसी कमजोरी का फायदा उठा लें, तो वे उसकी सेटिंग में अनधिकृत बदलाव कर सकते हैं।
फ्रांस सरकार ने जांच के दिए निर्देश
घटना की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ANSSI को जांच के निर्देश दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि साइबर हमले के पीछे कौन था और क्या फ्रांस के अलावा दूसरे यूरोपीय देशों में भी इसी तरह के सिस्टम को निशाना बनाया गया है।
पेरिस अभियोजन कार्यालय ने भी इस घटना को बड़े स्तर का साइबर हमला बताया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इंटरनेट से जुड़े रेफ्रिजरेशन उपकरणों को कई बड़े खाद्य खुदरा कारोबारियों के यहां निशाना बनाया गया।
सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में कमजोरी आने की आशंका
सरकारी अधिकारी के हवाले से आई जानकारी के अनुसार, साइबर सुरक्षा एजेंसी ने डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस के सॉफ्टवेयर में एक संभावित कमजोरी की पहचान की है। कंपनी के सिस्टम का इस्तेमाल सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
डैनफॉस ने बताया कि उसे फ्रांस में रेफ्रिजरेशन सिस्टम से जुड़ी घटनाओं की जानकारी मिली है। कंपनी के अनुसार, प्रभावित सिस्टम में सॉफ्टवेयर का पुराना संस्करण इस्तेमाल किया जा रहा था। कंपनी पहले भी ग्राहकों को सॉफ्टवेयर अपडेट रखने और पुराने उपकरणों को बदलने की सलाह देती रही है।
साइबर सुरक्षा कंपनी क्लैरोटी ने इससे पहले 9 अगस्त को डैनफॉस के सिस्टम में कुछ संभावित कमजोरियों पर रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि इन कमजोरियों का फायदा उठाकर हमलावर सुरक्षा जांच को दरकिनार करते हुए सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इन कमजोरियों और फ्रांस में हुए हमले के बीच संबंध की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
खाद्य पदार्थों की बर्बादी से बढ़ेगा आर्थिक नुकसान
इस साइबर हमले से प्रभावित सुपरमार्केट कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। रेफ्रिजरेशन व्यवस्था बाधित होने के कारण खराब हुए ताजा और फ्रोजन खाद्य पदार्थों को हटाना पड़ सकता है। इससे दुकानों की आपूर्ति व्यवस्था और ग्राहकों को सामान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
रिटेल कंपनी इंटरमार्शे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थिएरी कोटियार ने आशंका जताई कि इस घटना से एक ही दिन में पूरे देश के खुदरा कारोबार को कई करोड़ यूरो का नुकसान हो सकता है। वहीं, कोऑपरेटिव यू के प्रमुख डोमिनिक शेल्शर ने रेफ्रिजरेशन सिस्टम को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता जताई।
हालांकि, पूरे रिटेल सेक्टर को हुए नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
प्रभावित दुकानों में बहाली का काम जारी
फ्रांस के खुदरा कारोबार से जुड़े संगठनों के मुताबिक, कुछ प्रभावित स्टोर दोबारा काम करने लगे हैं, लेकिन कई जगह फ्रिज और फ्रीजर को बंद रखा गया है। दुकानों में तापमान की जांच, उपकरणों की सुरक्षा और खाद्य पदार्थों की स्थिति का आकलन करना जरूरी है।
इस घटना ने इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक उपकरणों की साइबर सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि हमलावर सिस्टम तक कैसे पहुंचे, किन सुरक्षा उपायों में कमी रही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
निष्कर्ष: फ्रांस के सुपरमार्केट में हुआ यह साइबर हमला दिखाता है कि डिजिटल सिस्टम पर निर्भर कारोबार में तकनीकी सुरक्षा की छोटी-सी कमजोरी भी बड़े आर्थिक नुकसान और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है।
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