टोक्यो। जापान में एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। शनिवार देर रात करीब एक बजे 5.7 तीव्रता का भूकंप आने से कई इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 22 लोग घायल हो गए। भूकंप के झटकों से कई दुकानों और इमारतों के शीशे टूटकर सड़कों पर बिखर गए। अचानक धरती हिलने से लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।
जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप का केंद्र शिजुओका प्रांत में जमीन से करीब 40 किलोमीटर नीचे था। हालांकि, इसके सबसे तेज झटके आइची प्रांत में महसूस किए गए। भूकंप के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच काफी डर का माहौल देखा गया।
एक महीने में तीसरी बार आया तेज भूकंप
जापान में नवंबर महीने के दौरान यह तीसरा बड़ा भूकंप बताया जा रहा है। इससे पहले 1 नवंबर को 6.0 तीव्रता और 7 नवंबर को 5.6 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। लगातार आ रहे भूकंपों ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विज्ञान एजेंसी ने लोगों को अगले सात दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसी के मुताबिक, आगामी दो से तीन दिनों के दौरान फिर से तेज झटके महसूस किए जाने की आशंका है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की अपील की गई है।
बुलेट ट्रेन की रफ्तार पर लगी रोक
भूकंप के बाद रेलवे प्रशासन ने एहतियातन प्रभावित क्षेत्रों में शिंकानसेन बुलेट ट्रेनों की गति कम कर दी। अधिकारियों का मानना है कि भूकंप के कारण रेल पटरियों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में ट्रेनों की रफ्तार कम करना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम है।
भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है जापान
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। देश चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन क्षेत्र में स्थित है और प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यही वजह है कि यहां सालभर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। हर साल करीब 1,500 भूकंप दर्ज किए जाते हैं, हालांकि इनमें से अधिकतर हल्की तीव्रता के होते हैं।
पहले भी बड़े भूकंप मचा चुके हैं भारी तबाही
जापान में प्राकृतिक आपदाओं का इतिहास काफी भयावह रहा है। वर्ष 2024 में नोटो प्रायद्वीप में आए विनाशकारी भूकंप में लगभग 600 लोगों की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2011 में 9.0 तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी और 18 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
लगातार भूकंप आने की घटनाओं को देखते हुए जापान में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से मौसम विज्ञान एजेंसी की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।
News Wani
