लखनऊ। दिवाली का त्योहार खुशियों और रोशनी का प्रतीक माना जाता है, लेकिन जरा सी लापरवाही इस खुशी को जिंदगीभर के दर्द में बदल सकती है। लखनऊ के अमित श्रीवास्तव के साथ करीब 25 साल पहले दिवाली के दिन ऐसा ही दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी। पटाखा जलाते समय अचानक उनके हाथ में ही जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि उनकी हथेली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और तीन उंगलियां कटकर अलग हो गईं।
अमित बताते हैं कि उस समय वह दिवाली पर पटाखे जलाने के लिए घर से बाहर निकले थे। एक हाथ में जलती हुई मोमबत्ती और दूसरे हाथ में पटाखा था। इसी दौरान अचानक उनका ध्यान भटक गया और मोमबत्ती तथा पटाखा एक ही हाथ में आ गए। वह कुछ समझ पाते, इससे पहले ही पटाखा हाथ में फट गया। कुछ ही सेकेंड में हुए इस हादसे ने उन्हें हमेशा के लिए दिव्यांग बना दिया।
धमाके से बुरी तरह जख्मी हुई हथेली
पटाखे के विस्फोट से अमित की बाईं हथेली का मांस बुरी तरह उड़ गया। उनकी तीन उंगलियां कटकर नीचे गिर गईं। दो उंगलियां पूरी तरह अलग हो गई थीं, जबकि एक आधी कट गई थी। हादसे के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। हाथ से लगातार खून बह रहा था। पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने तुरंत अपनी कार से उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
अमित को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों ने उनके हाथ को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोट इतनी गंभीर थी कि कटी हुई उंगलियों को दोबारा जोड़ना संभव नहीं हो सका। अंगूठे को बचाने का भी प्रयास किया गया, लेकिन उसमें संक्रमण और खराबी बढ़ने के कारण बाद में उसे भी काटना पड़ा।
बेटे की हालत देखकर मां को लगा गहरा सदमा
इस हादसे का असर सिर्फ अमित की जिंदगी पर ही नहीं पड़ा, बल्कि पूरे परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचा। अमित के मुताबिक, बेटे की ऐसी हालत देखकर उनकी मां बेहद दुखी रहने लगी थीं। उन्हें अपने बेटे के भविष्य की चिंता सताती रहती थी। अमित बताते हैं कि हादसे के करीब चार से छह महीने बाद वर्ष 2002 में होली के दिन उनकी मां का निधन हो गया। उनका मानना है कि बेटे के साथ हुए हादसे का सदमा मां के लिए बेहद पीड़ादायक साबित हुआ।
हादसे के बाद बदल गई जिंदगी
अमित बताते हैं कि दुर्घटना से पहले वह सामान्य जिंदगी जी रहे थे और ड्राइविंग भी करते थे, लेकिन हाथ की गंभीर चोट के बाद डॉक्टरों ने उन्हें वाहन चलाने से मना कर दिया। दिव्यांग होने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक वह लोगों के सामने अपना हाथ दिखाने से भी बचते रहे। इस हादसे ने उनके कई सपनों और योजनाओं को प्रभावित किया।
परिवार में दोबारा हुआ पटाखे से हादसा
अमित के परिवार में पटाखों से जुड़ी एक और दुर्घटना हुई। वर्ष 2019-20 के आसपास दिवाली के दौरान उनके भतीजे के चेहरे पर पटाखा फट गया। बच्चा छत पर चकरघिन्नी जलाने की कोशिश कर रहा था। काफी देर तक पटाखा नहीं जलने पर उसने उसे पलटकर दोबारा आग लगाने का प्रयास किया। इसी दौरान पटाखा सीधे उसके चेहरे पर फट गया। चेहरे और आंखों के आसपास जलन, सूजन और छाले पड़ गए। परिजन उसे तत्काल नीचे लेकर आए और डॉक्टर से उपचार कराया।
लोगों से की सावधानी बरतने की अपील
करीब 25 साल पहले हुए हादसे को याद करते हुए अमित आज भी भावुक हो जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि दिवाली पर पटाखे जलाते समय किसी तरह की लापरवाही न करें। पटाखे जलाने के दौरान जल्दबाजी या ध्यान भटकना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलाएं, बच्चों को अकेले आतिशबाजी न करने दें और एक हाथ में जलती मोमबत्ती तथा दूसरे हाथ में पटाखा लेकर आग लगाने से बचें। पटाखा जलाने के बाद उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और न जलने वाले पटाखे को दोबारा जलाने की कोशिश न करें।
अमित का कहना है कि त्योहार का असली आनंद सुरक्षित रहने में है। थोड़ी सी सावधानी किसी परिवार को जिंदगीभर के दर्द से बचा सकती है।
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