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जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमले की आशंका, नवंबर-दिसंबर के लिए सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आगामी नवंबर से दिसंबर के बीच बड़े आतंकी हमले की साजिश रचे जाने की आशंका जताई गई है। सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के बाद कमजोर पड़े आतंकी नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश में जुटा है। इसके लिए पुराने ठिकानों के बजाय छोटे नेटवर्क और नए ठिकानों के माध्यम से आतंकियों की गतिविधियां बहाल करने की तैयारी की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-ताइबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नेटवर्क को फिर से संगठित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बहावलपुर में जैश से जुड़े एक क्षतिग्रस्त परिसर में दोबारा गतिविधियां बढ़ने और लश्कर से जुड़े हैंडलरों तक फंडिंग पहुंचने की सूचनाएं भी सामने आई हैं।

एलओसी के आसपास नए ठिकाने बनाने की कोशिश

इनपुट के मुताबिक, नियंत्रण रेखा (एलओसी) के आसपास छोटे-छोटे ठिकानों के उभरने की जानकारी मिली है। माना जा रहा है कि इनका इस्तेमाल आतंकियों की आवाजाही और घुसपैठ की कोशिशों को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है। एजेंसियां सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

नवंबर तक नेटवर्क सक्रिय करने की कोशिश

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान नवंबर तक आतंकी नेटवर्क को पर्याप्त रूप से सक्रिय करने का प्रयास कर सकता है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े हमले को अंजाम देकर आतंकियों का मनोबल बढ़ाने की साजिश हो सकती है।

तुर्किये से बढ़ती नजदीकी पर भी नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकी भी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है। इनपुट के अनुसार, दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का इस्तेमाल पाकिस्तान आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने और नए ठिकाने तैयार करने में कर सकता है।

पुराने ठिकानों की जगह छोटे नेटवर्क पर जोर

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े कई ठिकानों को नुकसान पहुंचने के बाद अब उनकी गतिविधियों को पुराने ढांचे में बहाल करने के बजाय छोटे और बिखरे नेटवर्क के जरिए संचालित करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इसे आतंकी संगठनों की नई रणनीति के तौर पर देख रही हैं।

जम्मू-कश्मीर में संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्र, संदिग्ध नेटवर्क और आतंकियों के मददगारों पर विशेष निगरानी बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की संभावना है।

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