पडरौना। छेड़खानी के मुकदमे में आरोपित एवं फरार चल रहे दारोगा ने मंगलवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। दो अक्टूबर 2016 को वादी ने कसया थाने में सूचना दी कि स्वाट टीम में तैनात दारोगा तौफिक अहमद शाम को छह बजे घर आए। पीने के लिए पानी मांगे। वह पानी लेने अंदर गए। इस बीच दारोगा ने बगल के कमरे में पढ़ाई कर रही आठ वर्षीय पुत्री से छेड़खानी करने लगे। शोर सुनकर बाहर आया तो दारोगा भागे इस दौरान वे गिर पड़े। उन्हें चोटें भी आईं। मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने दारोगा को जेल भेज दिया। 17 फरवरी 2017 को जमानत पर वह बाहर आया। तबसे वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट व एडीजे दिनेश कुमार ने वांरट जारी किए।

कसया थानाध्यक्ष से लेकर डीजीपी को पत्र लिखकर आरोपित दारोगा को कोर्ट के समक्ष उपस्थित करने में सहयोग मांगा। पर आरोपित कभी कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। चार दिसंबर 2025 को भी कोर्ट ने एसओ कसया को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। पर एसओ उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट के प्रयास से आरोपित ने दस वर्ष बाद कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।
किशोरी से दुष्कर्म का आरोपित दोषी करार
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट व एडीजे दिनेश कुमार की अदालत ने किशोरी के दुष्कर्मी को दोषी करार दिया। सुनवाई के दौरान आराेपित न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं था। कोर्ट ने उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर गिरफ्तारी के आदेश तरयासुजान पुलिस को दिया है। वादी ने तरयासुजान थाने में सूचना दी कि उनकी 15 वर्षीय पुत्री घटना के दिन सुबह गन्ना छिलने गई थी।

इस बीच आरोपित व्यास सिंह उसे खींच ले गया और दुष्कर्म किया। शिकायत करने पर आरोपित व उसके स्वजन मारपीट किए। अपशब्द कहे। पुलिस ने आरोपित व्यास सिंह व विवाद करने वाले सुभाष, सुमन व प्रभा के विरुद्ध मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने सुभाष, सुमन व प्रभा को बरी कर दिया।
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