श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में गैर-स्थानीय श्रमिकों पर हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। घटना के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सुरक्षा एजेंसियों और सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ अभियान और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकियों को उनके सुरक्षित ठिकानों से बाहर निकलने से पहले ही निष्प्रभावी करने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाई जाए।
बैठक में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद विरोधी अभियानों, संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा और गैर-स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। उपराज्यपाल ने सुरक्षा एजेंसियों से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए और समन्वित कार्रवाई के जरिए आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए।
कुलगाम हमले के बाद बढ़ी सतर्कता
कुलगाम में गैर-स्थानीय श्रमिकों पर हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की जा रही है, जबकि प्रमुख बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
सुरक्षा एजेंसियां घटना में शामिल आतंकियों और उनके सहयोगियों की तलाश में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। कई इलाकों में घेराबंदी और तलाशी अभियान (कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन) भी तेज कर दिए गए हैं।
आतंकियों को सुरक्षित ठिकानों से निकलने से पहले रोकने पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ सक्रिय रणनीति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य केवल हमलों के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि आतंकियों की योजनाओं को पहले ही विफल करना होना चाहिए।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खुफिया सूचनाओं का अधिक प्रभावी उपयोग किया जाए और आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए। यदि किसी आतंकी गतिविधि की सूचना मिलती है तो तत्काल समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा बनी रहे।
खुफिया तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश
बैठक में खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। उपराज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि आतंकियों की गतिविधियों, उनके ठिकानों और संभावित हमलों से जुड़ी सूचनाओं को समय रहते एकत्र कर उन पर त्वरित कार्रवाई की जाए।उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि सूचना साझा करने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्प्रभावी किया जा सके।
गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में गैर-स्थानीय श्रमिकों और कामगारों पर हुए हमलों को देखते हुए उनकी सुरक्षा भी समीक्षा बैठक का प्रमुख विषय रही। उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न जिलों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाए।इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में कार्य कर रहे श्रमिकों के ठहरने के स्थानों और कार्यस्थलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन को स्थानीय स्तर पर सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।आतंकवाद के खिलाफ अभियान रहेगा जारीसुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। हाल के महीनों में सुरक्षाबलों ने कई सफल अभियानों के जरिए आतंकियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इसी प्रकार के अभियान तेज किए जाएंगे।सुरक्षा बलों का लक्ष्य न केवल सक्रिय आतंकियों को पकड़ना या मार गिराना है, बल्कि उनके वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी पूरी तरह समाप्त करना है। इसके लिए विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जनता के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी भरोसा दिलाया है कि घाटी में शांति और सामान्य जनजीवन बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था की लगातार होगी समीक्षा
उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी। विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर सुरक्षा रणनीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बलों की तैनाती भी की जाएगी।कुलगाम आतंकी हमले के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। आने वाले दिनों में आतंकवाद के खिलाफ अभियान और तेज होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा आतंकवाद से जुड़े किसी भी खतरे से सख्ती से निपटा जाएगा।
News Wani
