लखनऊ: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़े आतंकी साजिश का पर्दाफाश करते हुए ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर भारत में दहशत फैलाने की योजना बना रहा था। इस गिरोह के सदस्य देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, रेलवे संपत्तियों और राजनीतिक हस्तियों की रेकी कर उन्हें निशाना बनाने की साजिश में जुटे थे। ATS ने इस मामले में मेरठ निवासी गिरोह के सरगना शाकिब, विकास गहलावत, लोकेश और अरबाब को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था।
पूछताछ में खुले ये राज
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य भारत में भय और अस्थिरता का माहौल पैदा करना था। इसके लिए ये लोग रेलवे सिग्नल बॉक्स को नुकसान पहुंचाने, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। गिरोह ने गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ में कई स्थानों की रेकी भी की थी। सरगना शाकिब, जो पेशे से नाई है, कट्टरपंथी संगठनों और विदेशी नंबरों से भी जुड़ा हुआ था। वह पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में रहकर वीडियो और सूचनाएं साझा करता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कुछ स्थानों पर छोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया और उनके वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजे। इसके बदले उन्हें क्यूआर कोड के जरिए पैसे मिलते थे।
गजवा-ए-हिंद जैसे उग्र विचारों के नाम पर भड़काते थे
पाकिस्तानी हैंडलर्स इन आरोपियों को ओसामा बिन लादेन, गजवा-ए-हिंद जैसे उग्र विचारों और संगठनों के नाम पर भड़काते थे। पैसे के लालच में आकर गिरोह के सदस्य देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए और संवेदनशील जानकारियां जुटाने लगे। ATS के मुताबिक, गिरोह लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल और अन्य संपत्तियों को आगजनी और विस्फोट के जरिए नुकसान पहुंचाने की बड़ी योजना बना रहा था।
हालांकि, इससे पहले कि वे अपनी साजिश को अंजाम दे पाते, ATS ने समय रहते कार्रवाई कर सभी आरोपियों को दबोच लिया। आरोपियों के पास से एक केन ज्वलनशील पदार्थ, 7 स्मार्टफोन और 24 पंपलेट बरामद किए गए हैं। ATS अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।
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