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यूपी की सियासत में मुस्लिम नेतृत्व को लेकर नई बहस, AIMIM नेता का बड़ा बयान; अखिलेश के अयोध्या दौरे पर राजभर ने कसा तंज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व और अयोध्या दौरे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब मुस्लिम समाज का कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि देश का प्रधानमंत्री भी बनेगा।

वारिस पठान ने अपने बयान में अमेरिका के मिशिगन राज्य में अब्दुल अल-सैयद की चुनावी सफलता का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में देखने की सोच बदलनी चाहिए। समाज के लोगों को राजनीति में आगे बढ़कर नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उनके मुताबिक, अब मुस्लिम समाज केवल राजनीतिक दलों के लिए वोट देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनाव जीतकर सत्ता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से मुस्लिम समुदाय के लोगों को लेकर सीमित सोच रखी जाती रही है। कभी उन्हें छोटे-मोटे कामों तक सीमित बताकर राजनीतिक रूप से कमजोर दिखाने की कोशिश होती है, लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। वारिस पठान ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में मुस्लिम समाज का प्रतिनिधि देश के सर्वोच्च राजनीतिक पदों तक पहुंच सकता है।

अखिलेश के अयोध्या दौरे पर राजभर की टिप्पणी

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी शुरू हो गई है। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को अयोध्या जाने के साथ उन लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए, जिन पर अतीत में कारसेवा के दौरान गोलीबारी हुई थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को अपने चाचा और परिवार के अन्य सदस्यों को भी साथ लेकर अयोध्या जाना चाहिए।

राजभर ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उस समय सरकार के फैसले की जिम्मेदारी तत्कालीन नेतृत्व की थी। उन्होंने अखिलेश यादव से मथुरा और काशी जाने की तारीख भी बताने की मांग की।

मंदिर चोरी के मामले पर भी गरमाई राजनीति

अखिलेश यादव के एक बयान को लेकर राजभर ने मंदिर में हुई चोरी के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के संबंध में टिन्नू यादव ने अखिलेश यादव से बातचीत की थी और उन्हें चोरी की रकम तथा घटना से जुड़ी जानकारी दी थी। इस मुद्दे को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

सपा और कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

राजभर के बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या जा रहे हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इससे परेशानी क्यों होनी चाहिए। उन्होंने इसे आस्था से जुड़ा विषय बताया।

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। उनके दर्शन करना किसी भी व्यक्ति के लिए धार्मिक आस्था का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मंदिर और धर्म के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

बिस्मिल्लाह खां के मकान को लेकर भी विवाद

वाराणसी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पुश्तैनी मकान को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया है। अखिलेश यादव ने मकान को तोड़े जाने पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में भाजपा ने कहा कि परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद था, जो अब सुलझ चुका है। भाजपा के मुताबिक, मकान की जर्जर स्थिति को देखते हुए वहां संग्रहालय बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इस तरह मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व, अयोध्या में राम मंदिर दर्शन और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर प्रदेश की सियासत में लगातार बयानबाजी हो रही है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं।

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