फ़तेहपुर। गुंडंे माफियाओं एवं अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाली योगी सरकार के आदेश को राजस्व विभाग के लेखपाल ना केवल हवा में उड़ा देते हैं बल्कि माफियाओं के साथ सांठगांठ करके जमीनों के काले कारोबार में शामिल होकर दिन दुगनी रात चौगुनी रफ्तार की तेजी से करोड़ों रुपए कमाने में लगे हुए हैं। सदर तहसील क्षेत्र के इन दो चर्चित लेखपाल सुनील कुमार राणा व अनूप सिंह जो क्रमशः अलादातपुर व अबुल कासिमपुर में तैनात रहने के दौरान ना केवल सेवानियमावली का जमकर दुरुपयोग किया बल्कि अपराधियों एवं गैंगस्टर माफियाओं के साथ मिलकर जमीनों के काले खेल में शामिल रहे। यही नहीं इसकी जानकारी जब सत्ताधारी दल के नेताओ व एवं जनप्रतिनिधियों को होने पर इनकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई। डीएम के आदेश के बाद इन लेखपालों का स्थानांतरण कर दिया गया लेखपाल अनूप सिंह का चुरियानी शमियाना एवं लेखपाल सुनील कुमार राणा को अलादातपुर से अढ़ावल भेज दिया गया। गैंगस्टर माफियाओं एवं सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं की मिलीभगत के चलते स्थानांतरण होने के बाद उनके जमीन के काले कारोबार से जुड़े हुए लेखपालों के स्थानांतरण के बाद उनके आकाओं की पैरवी से चंद लम्हो में ही स्थानांतरण को रद्द करवा दिया गया। चर्चित लेखपालों के काले कारमनो को उजागर करने वाले सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं द्वारा इसकी जिले के प्रभारी मंत्री से भी शिकायत की गई जिसके पश्चात इन दोनों भ्रष्ट लेखपालों का स्थानांतरण एक बार फिर डीएम के निर्देश पर कर दिया गया। जिसमे लेखपाल सुनील कुमार राणा का स्थानांतरण कुसुंबी छीछनी एवं अनूप कुमार का स्थानांतरण उदई सरांय रारा कर दिया गया। जानकारों की माने तो स्थानांतरण के बाद एक बार फिर भ्रष्ट लेखपालों की जोड़ी सत्ताधारी दल के सहयोगी संगठन के एक माननीय की शरण में पहुंचते हैं और माननीय की पैरवी के बाद एक बार फिर पृष्ठ लेखपालों के स्थानांतरण के आदेश को रद्द करके उन्हें फिर से अभय दान दे दिया जाता है। भ्रष्ट लेखपालों की जोड़ी अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर माफियाओं के साथ साठगांठ करके उनके जमीन के कारोबार में ना केवल साथ देते हैं बल्कि उसमे बराबर के हिस्सेदार भी हैं। स्थानांतरण के आदेश को बार-बार बदलवाने की हैसियत रखने वाले यह लेखपाल कोई मामूली लेखपाल ना होकर बल्कि सत्ताधारी दल के नेताओं एवं गैंगस्टर माफियाओं के गठजोड़ में सेतु का भी काम करते हैं। गैंगस्टर माफियाओं के ज़मीनों के काले कारोबार में इनडायरेक्ट रूप से सत्ताधारी दल के नेताओं को लाभ पहुंचाने वाले लेखपाल का स्थानांतरण को किसके दबाव में रद्द कर दिया जाता है। प्रभारी मंत्री की शिकायत डीएम के निर्देश पर उप जिलाधिकारी द्वारा किया गया स्थानांतरण चंद लम्हों में बदल दिया जाता है और कमाऊ पूत लेखपालों को एक बार फिर से अपने भ्रष्टाचार करने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है ? शायद इसी को सत्ताधारी दलों के नेताओ व गैंगस्टर माफियाओं का गठजोड़ की बॉन्डिंग कहा जाता है।
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