फतेहपुर। हत्या के एक मामले में ग्राम प्रधान समेत पांच आरोपियों को न्यायालय ने बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट से बरी होने के बाद आरोपियों ने इसे न्याय की जीत बताया।
बताते चलें कि 30 सितंबर 2021 को अनीता देवी पत्नी गोपाल, निवासी चक मौजम, थाना हथगाम ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान संतोष यादव और उसके दोनों भाइयों अखिलेश व उमेश, धनपति देवी तथा राम सिंह उर्फ दौलत ने मिलकर 29 अगस्त 2021 को उनके पति गोपाल को लाठी-डंडों और खुर्पी से मारपीट कर घायल कर दिया था। इलाज के दौरान 15 सितंबर को गोपाल की मौत हो गई थी।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अजीत सिंह राठौर, अंशुमान सिंह और जूनियर अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह ने न्यायालय में पैरवी की। बचाव पक्ष की जिरह के दौरान प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी और घटना वाली रात मृतक के एक दिन पहले से ही ओम नर्सिंग होम में भर्ती होने से संबंधित तथ्य सामने आए।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि वादिनी ने अपने पुत्र कमलेश के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म के मुकदमे में समझौते का दबाव बनाने के लिए यह मुकदमा दर्ज कराया था। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मृतक गोपाल की मौत बीमारी के कारण इलाज के दौरान हुई थी।
अपने पक्ष के समर्थन में अधिवक्ताओं ने मेडिकल साक्ष्य और इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए। गवाहों के बयानों, चिकित्सा साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर-2, पूजा विश्वकर्मा ने ग्राम प्रधान समेत पांचों आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बाइज्जत बरी कर दिया।
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