मध्य प्रदेश के छतरपुर में 108 एंबुलेंस सेवा के दुरुपयोग का मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छतरपुर एंबुलेंस दुरुपयोग की इस घटना में एक चालक मरीज की जगह एक कॉलेज छात्रा को बैठाकर सायरन बजाते हुए निजी काम से जा रहा था। एक स्थानीय पत्रकार ने इसका खुलासा किया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चालक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
घटना उस समय सामने आई जब एक पत्रकार की नजर सायरन बजाती एंबुलेंस में बैठी छात्रा पर पड़ी। शक होने पर उन्होंने बाइक से एंबुलेंस का पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे रुकवाया। पूछताछ के दौरान चालक घबरा गया और छात्रा को अपनी बहन बताने लगा, लेकिन वह उसका नाम तक नहीं बता सका। पूरे घटनाक्रम का वीडियो मौके पर रिकॉर्ड कर लिया गया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
कैसे हुआ खुलासा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एंबुलेंस सामान्य मरीज परिवहन के बजाय निजी उपयोग में लाई जा रही थी। सायरन बजाकर वाहन को प्राथमिकता दिलाने की कोशिश की जा रही थी, जिससे मामला और गंभीर हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एंबुलेंस में कोई मरीज नहीं था, बल्कि एक छात्रा बैठी हुई थी।
कार्रवाई और जांच
मामले के सामने आते ही संबंधित अधिकारियों ने तुरंत जांच शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, 108 एंबुलेंस सेवा का यह दुरुपयोग नियमों का गंभीर उल्लंघन है। जांच के बाद चालक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, साथ ही संबंधित वाहन के वेंडर पर भी कार्रवाई की गई है।
इस छतरपुर एंबुलेंस दुरुपयोग मामले ने आम जनता में नाराजगी पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि जब गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती, तब इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।आपातकालीन सेवाओं का इस तरह दुरुपयोग न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि इससे वास्तविक जरूरतमंदों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा। साथ ही एंबुलेंस सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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