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दिल्ली-NCR में नाबालिगों से यौन अपराध पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस से मांगा जवाब; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप और यौन हिंसा की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने पिछले दो महीनों में सामने आए तीन मामलों का स्वतः संज्ञान लिया। इनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर की घटनाएं शामिल हैं।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई के दौरान 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले का संदर्भ देते हुए पूछा कि उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए और उससे क्या सबक लिया गया। अदालत ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल संवेदना जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

तीन मामलों पर अदालत ने लिया संज्ञान

4 अगस्त: नोएडा से दिल्ली जा रही बस में 16 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप का मामला सामने आया। पीड़िता ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में सवार हुई थी और आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर उतारा। बताया गया कि बस करीब 47 किलोमीटर तक चली और उसके शीशों पर पर्दे लगे थे।

12 सितंबर: दिल्ली के स्वरूप नगर में 16 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया। अगले दिन उसका शव खेत के पास खुले मैदान में मिला। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें तीन नाबालिग बताए गए हैं।

21 सितंबर: कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय छात्रा अपने दोस्त के साथ बैठी थी। आरोप है कि तीन युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

खराब रोशनी और निगरानी की कमी पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों को खराब रोशनी, निगरानी की कमी और पर्याप्त पुलिस पेट्रोलिंग के अभाव में हाई रिस्क जोन नहीं बनने दिया जा सकता। अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था में कमियों को दूर करने और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

आस्था कुंज पार्क की घटना का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि LSR कॉलेज की छात्राओं की ओर से पहले भी यौन उत्पीड़न की शिकायत किए जाने की बात सामने आई थी। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि शिकायतों के बाद सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार क्यों नहीं किए गए।

सम्मान के साथ जीना मौलिक अधिकार

अदालत ने कहा कि हिंसा से मुक्त होकर सम्मान के साथ जीवन जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं को लेकर दिल्ली पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा है।

दिल्ली में बच्चों से जुड़े POCSO के 1,553 मामले

उपलब्ध NCRB आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यह औसतन प्रतिदिन चार से अधिक मामलों के बराबर है। 2025 की रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है।

आस्था कुंज पार्क मामले में पुलिस ने 22 सितंबर को एक आरोपी के साथ मुठभेड़ की थी, जिसमें आरोपी घायल हुआ था। पुलिस के अनुसार, मौके से बाइक और पिस्टल बरामद की गई थी।

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