नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट को लेकर दर्ज एफआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने मामले में दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने के साथ ही इस संबंध में हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश पर भी फिलहाल स्थगन लगा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर के आधार पर आगे की कार्रवाई पर रोक रहेगी।
मामला सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट से जुड़ा है, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं पर जवाब मांगा है। अब चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में संबंधित पक्ष अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे। शीर्ष अदालत के अगले आदेश के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
एफआईआर की कार्रवाई पर फिलहाल रोक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित व्यक्ति को फिलहाल राहत मिली है। एफआईआर के आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने से मामले में तत्काल गिरफ्तारी या अन्य कार्रवाई का रास्ता बंद रहेगा। हालांकि, यह राहत मामले की अगली सुनवाई और अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।
हाईकोर्ट के आदेश को भी किया स्थगित
शीर्ष अदालत ने मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर भी फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत अब मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का फैसला करेगी।
चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इस दौरान पक्षकार मामले से जुड़े दस्तावेज और अपना पक्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। अगली सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि एफआईआर और हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई गई रोक को आगे जारी रखा जाए या मामले में कोई अन्य निर्देश दिया जाए।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ा कानूनी विवाद
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद शुरू हुआ विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ऐसे मामलों में पोस्ट की सामग्री, उसके संदर्भ और संबंधित कानूनी प्रावधानों को लेकर अदालत में विस्तृत सुनवाई होती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के चलते मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक है।
मामले की अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और दलीलों के आधार पर अदालत आगे की दिशा तय करेगी। तब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।
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