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शबाना आजमी का बड़ा बयान: बोलीं- हमें कभी फतवे तो कभी आतंकवादी कहकर निशाना बनाया जाता है

नई दिल्ली। मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी ने अपने और अपने पति एवं लेखक जावेद अख्तर को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कई बार उनके विचारों और बयानों को लेकर उन्हें अलग-अलग वर्गों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। शबाना आजमी के मुताबिक, उन्हें कभी फतवे का सामना करना पड़ता है तो कभी आतंकवादी तक कह दिया जाता है।

 

शबाना आजमी ने कहा कि वह और जावेद अख्तर अक्सर ऐसे मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं, जिन पर समाज में मतभेद देखने को मिलता है। इसी वजह से कई बार दोनों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि कुछ लोग उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों की ओर से स्वीकार नहीं करते।

 

अभिनेत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखना आसान नहीं है। अलग-अलग विचार रखने के कारण उन्हें और जावेद अख्तर को कई तरह के आरोपों और विरोध का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद दोनों अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते।

 

शबाना आजमी का बयान एक बार फिर चर्चा में है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सार्वजनिक जीवन में विचारों की स्वतंत्रता के साथ-साथ आलोचना और विरोध का सामना करना भी पड़ता है।शबाना आजमी ने कहा कि उनके और जावेद अख्तर के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपने विचारों को ईमानदारी से व्यक्त करते रहें। उनका मानना है कि किसी मुद्दे पर अलग राय रखना किसी व्यक्ति को गलत या देशविरोधी नहीं बनाता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए।

 

उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ उन्हें यह समझ आया है कि हर किसी को खुश करना संभव नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपनी सोच के अनुसार बात करता है तो उसके विचारों से कुछ लोग सहमत होंगे, जबकि कुछ लोग उसका विरोध भी करेंगे। ऐसे में आलोचनाओं को व्यक्तिगत रूप से लेने के बजाय अपने सिद्धांतों पर कायम रहना जरूरी है।

 

अभिनेत्री ने कहा कि वह और जावेद अख्तर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने से इसलिए पीछे नहीं हटते, क्योंकि उनका मानना है कि कलाकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की भी समाज के प्रति जिम्मेदारी होती है। उनके मुताबिक, चुप रहने के बजाय जरूरी मुद्दों पर बातचीत और बहस होनी चाहिए।

 

शबाना आजमी ने यह भी संकेत दिया कि उनके परिवार और निजी जीवन को लेकर भी कई बार सार्वजनिक मंचों पर तरह-तरह की टिप्पणियां की जाती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि आलोचना और व्यक्तिगत हमलों के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी की विचारधारा से असहमति होना अलग बात है, लेकिन किसी व्यक्ति को निशाना बनाना उचित नहीं है।

 

उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय को लेकर चर्चा में रहते हैं। शबाना आजमी और जावेद अख्तर भी लंबे समय से अपने बेबाक विचारों के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उनके बयानों पर अक्सर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छिड़ जाती है।

 

शबाना आजमी के ताजा बयान ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, वैचारिक मतभेद और सार्वजनिक जीवन में होने वाली आलोचना को लेकर चर्चा तेज कर दी है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके बयान को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

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