काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में अचानक आए तेज बहाव ने घरों, सड़कों, पुलों और दूसरे ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह आपदा के बीच समय पर मिली चेतावनी ने कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने भोटेकोशी नदी में अचानक बढ़ते बाढ़ के पानी को देखा। खतरे को भांपते हुए उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को तत्काल ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों की ओर भागने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि चेतावनी देने के करीब 10 सेकेंड बाद ही पानी का तेज बहाव आसपास के कई ढांचों को बहा ले गया। कुछ सेकेंड की यह सतर्कता कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित हुई।
समय रहते भेजे गए लाखों मोबाइल अलर्ट
नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन को सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके करीब 15 से 16 मिनट के भीतर रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 6 लाख SMS अलर्ट भेजे गए। इन चेतावनियों के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का मौका मिला।
नेपाल में 903 लोगों की मौत
भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल में अब तक 903 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों का आंकड़ा 919 तक पहुंच गया है। इसके अलावा 4,200 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश
बाढ़ के बाद कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में लोग फंसे हुए हैं। त्रिशूली-3A समेत कई परियोजनाओं की सुरंगों के मुहाने मलबे और कीचड़ से बंद हो गए हैं। सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
भारी मशीनों की मदद से सुरंगों के रास्ते से मलबा हटाया जा रहा है। बचाव दल अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि कई स्थानों पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
भारत ने भेजी फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें
नेपाल में बाढ़ से हुई मौतों के बाद मृतकों की पहचान में मदद के लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है। टीम DNA सैंपल की जांच के जरिए शवों की पहचान में नेपाली अधिकारियों की सहायता कर रही है।
इसके अलावा भारतीय टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल में राहत अभियान में सहयोग कर रही है। टीम हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी है।
नेपाल-चीन व्यापार मार्ग को भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। सीमा चौकी, फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे क्षेत्र के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में आ गए। इस मार्ग के बंद होने से दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है।
बिजली बहाली का काम तेज
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बिजली व्यवस्था भी चरमरा गई थी। नुवाकोट के करीब 90 प्रतिशत प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। रसुवा में भी बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम जारी है। प्रभावित लोगों के लिए सोलर सिस्टम और सोलर सेट की व्यवस्था भी की जा रही है।
बैरियर झील का पानी निकलने से टला बड़ा खतरा
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक बहाव के जरिए लगभग पूरी तरह निकल गया है। इससे झील के अचानक टूटने और डाउनस्ट्रीम इलाकों में एक और विनाशकारी बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हुआ है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। प्रशासन, सुरक्षा बल और विशेषज्ञ टीमें प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को तलाशने, शवों की पहचान करने और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने में जुटी।
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