काठमांडू। नेपाल में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचा दी है। आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 804 तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो सकी है, जिसके चलते प्रशासन ने अज्ञात शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई स्थानों पर सैकड़ों कब्रें तैयार की गई हैं।
आपदा के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया है। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित होकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों तथा लापता व्यक्तियों की तलाश में जुटी हैं।
ग्लेशियरों को लेकर पहले ही जताई गई थी चिंता
इस बीच ग्लेशियरों से जुड़ी संभावित आपदा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करीब तीन महीने पहले ग्लेशियरों की स्थिति और संभावित खतरे से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन समय रहते संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अब इस मामले में लापरवाही और समय पर चेतावनी नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और अचानक जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में समय रहते चेतावनी प्रणाली मजबूत करना और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बेहद जरूरी है।
सैकड़ों कब्रें तैयार, पहचान का इंतजार
अज्ञात शवों की संख्या बढ़ने के बाद प्रशासन के सामने उनकी पहचान और अंतिम संस्कार की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण उन्हें निर्धारित स्थानों पर दफनाने की तैयारी की गई है। परिजनों की तलाश और शवों की पहचान के लिए आवश्यक प्रक्रिया भी जारी है।
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने, घायलों के उपचार और लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता दी है। हालांकि, कई दुर्गम इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण राहत अभियान में मुश्किलें सामने आ रही हैं।राहत शिविरों में बढ़ी लोगों की संख्या
बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर राहत शिविरों में रखा जा रहा है। इन शिविरों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। कई परिवारों ने अपने घर, खेत और रोजमर्रा की जरूरत का सामान गंवा दिया है। प्रभावित लोगों के सामने अब पुनर्वास और दोबारा जिंदगी शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
मलबे और नदियों के किनारे जारी तलाश
लापता लोगों की तलाश के लिए सुरक्षाकर्मी और राहत दल लगातार अभियान चला रहे हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बाद कई इलाकों में मलबा हटाने का काम तेज किया गया है। राहतकर्मी नदियों के किनारे और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी तलाशी अभियान चला रहे हैं। आशंका है कि कुछ लापता लोगों के शव बाढ़ के पानी के साथ दूर तक बह गए होंगे।
सड़कों और पुलों को भारी नुकसान
आपदा से नेपाल की सड़क और पुल व्यवस्था को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। कई संपर्क मार्ग पानी और मलबे में बह गए हैं, जबकि कुछ पुल क्षतिग्रस्त होने से गांवों और कस्बों का संपर्क प्रभावित हुआ है। दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई स्थानों पर राहत दलों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
संचार व्यवस्था प्रभावित होने से बढ़ी मुश्किल
कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण लोगों को अपने परिजनों से संपर्क करने में परेशानी हो रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में संचार और बिजली व्यवस्था जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
आपदा में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण शवों की पहचान करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। पहचान की प्रक्रिया के लिए शवों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। परिजनों से संपर्क कर उनकी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि अज्ञात शवों की पहचान संभव हो सके। प्रशासन ने लोगों से लापता परिजनों की सूचना संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की है।
मौसम और पहाड़ी इलाकों पर नजर
राहत एवं बचाव एजेंसियां मौसम की स्थिति पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश होने पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा जा रहा है।
भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने की तैयारी पर जोर
इस भीषण आपदा के बाद नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियरों, नदियों और पहाड़ी क्षेत्रों की लगातार निगरानी के साथ समय रहते चेतावनी जारी करने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर आपदा प्रबंधन, सुरक्षित पुनर्वास और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत भी सामने आई है।
फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान लापता लोगों की तलाश, अज्ञात शवों की पहचान, घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने पर है। हजारों लोगों की जिंदगी इस आपदा से प्रभावित हुई है और आने वाले दिनों में पुनर्वास का काम सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
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