खरेला महोबा ऐतिहासिक कजली महोत्सव की 845 वी वर्षगाँठ पर रविवार को महोबा के खरेला कस्बे मे आल्हा के नए अध्याय आल्ह खंड विमर्श को लोकार्पित किया गया. देश के विभिन्न हिस्सों से आये करीब डेढ़ सैकड़ा आल्हा गायकों की उपस्थिति मे बनाफरी आल्हा गायन के सम्राट स्व 0 शिवराम सिंह नाना की स्मृति मे आयोजित आल्हा गायन मे यह कार्यक्रम आयोजित किया गया.विधान परिषद सदस्य जितेंद्र सिंह सेंगर इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे मौजूद रहे.
जगनिक शोध संस्थान के संयोजन मे आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता आल्हा के विद्वान् ठाकुर उत्तम सिंह ने की. आल्हा गायक चरण सिंह द्वारा सुमरिणी के प्रस्तुति करण के उपरान्त विद्वान् श्याम लाल ने आल्हा की प्रस्तावना रखी. मध्य प्रदेश के छतरपुर से आये विद्वान् डा हरी सिंह घोष ने कहा की पुस्तक आल्हा खंड विमर्श मे रचनाकार डा वीरेंद्र निरझर ने आल्हा के विभिन्न अनछुए पहलूओ पर बिस्तार से चर्चा की है ओर तमाम अन सुलझे सवालो को हल किया है. पुस्तक आल्हा के शोधार्थियों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होंगी.
एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने कहा की महोबा को आल्हा ऊदल की धरती के रूप मे देश विदेश मे जाना जाता है. यहां kebशूर वीरों ने अपने युद्ध कौशल से हर बार सफलता का परचम फहराया. आल्हा विमर्श पुस्तक मे चंदेलकालीन विभिन्न घटनाओ को संकलन करके प्रस्तुत किया है तो हमारे इतिहास को लिपिबद्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है. पुस्तक के लेखक वरिष्ठ साहित्यकार डा वीरेंद्र निरझर ने कहा की आल्हा गाथा काव्य है. आल्हा गायको द्वारा इसे अपने अपने अंदाज मे प्रस्तुत किया जाता है जिससे इसकी कहानी मे अतिश्योक्ति तो है साथ ही तमाम विसंगति भी आई है. आल्हा खंड विमर्श मे इन्हे दूर करके सही तथ्यों के साथ प्रस्तुत करंने का प्रयास किया गया है.
कार्यक्रम मे चरखारी ब्लाक प्रमुख सीमा जयराम कुशवाहा, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता यशोवर्धन सिंह चंदेल, जगनिक शोध संस्थान के अखिलेश द्विवेदी, बार के पूर्व अध्यक्ष भारत विशाल शुक्ला, मानवाधिकार आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अशोक सिँह, महासचिव राम रत्न दीक्षित, रमेश शर्मा, राम सिँह यादव, पुष्पा सिंह, आशीष सिंह, डा अशोक कुमार सिंह आदि प्रमुख थे. संचालन विश्वनाथ सिंह राघव ने किया. आभार प्रदर्शन शिवपाल सिंह गौतम ने किया.

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