– जोधा सिंह अटैया समेत 51 क्रांतिकारियों को दी श्रद्धांजलि
– शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी।
बिंदकी, फतेहपुर। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रणबांकुरे अमर शहीद जोधा सिंह अटैया एवं उनके 51 साथी क्रांतिकारियों की शहादत दिवस पर खजुहा के पारादान स्थित बावनी इमली स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शहीद स्मारक पहुंचकर बलिदानियों की गाथा के मूक गवाह इमली के पेड़ पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस दौरान पूरा स्थल भारत माता की जय और अमर शहीदों की जय के नारों से गूंज उठा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज्ञानेंद्र, श्री बालाजी सेवा न्यास के अध्यक्ष लक्ष्मीचंद्र ओमर मोना, पूर्वीन माता सेवा समिति के अध्यक्ष दशरथ सिंह परिहार, युवा विकास समिति के जिला प्रमुख आलोक गौड़ समेत अरुण, अजमेर सिंह, प्रधान कृष्णचंद्र, शिवशंकर सिंह रिंकू, अमित पटेल, सुनील कुमार, राहुल यादव, मनोज सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से क्रांतिकारियों की अमर गाथा को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। आरएसएस के ज्ञानेंद्र ने कहा कि बावनी इमली स्मारक 28 अप्रैल 1858 की उस रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐतिहासिक घटना का गवाह है, जब ब्रिटिश हुकूमत ने 52 स्वतंत्रता सेनानियों को एक ही इमली के पेड़ पर फांसी दे दी थी। इन वीरों ने भारत माता को गुलामी के दंश से बचाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। समाजसेवी लक्ष्मीचंद्र ओमर ने कहा कि इन बलिदानियों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वहीं समाजसेवी दशरथ सिंह परिहार ने कहा कि यही रणबांकुरे अमर शहीद आजादी के असली नायक हैं। युवा विकास समिति के प्रवक्ता आलोक गौड़ ने कहा कि 52 क्रांतिकारियों की शहादत सर्वाेच्च बलिदान का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
बच्चो ने निकाली रैली: खजुहा के पुरषोत्तम इंटर कालेज खजुहा एवं रामपाल बिटाना देवी महाविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा शहीद स्मारक पहुचकर रैली निकाल श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। शिक्षकों द्वारा बच्चों को परिसर का भ्रमण करा आजादी की लड़ाई में अमर क्रांतिकारियों की भूमिका की जानकारी दी गई।
News Wani
