बनमनखी (पूर्णिया)। साधारण परिवार व साधारण वेशभूषा में रहने वाला ग्रामीण कार्य प्रमंडल, झाझा में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के आय से अधिक संपत्ति होने तथा ईओयू द्वारा की गई छापामारी की सूचना जब बनमनखी स्थित उनके अन्य परिवार वालों को हुई तो सभी इस कारनामे से हतप्रभ दिखते रहे।
इंजीनियर गोपाल कुमार का पैतृक आवास बनमनखी नगर परिषद के वार्ड नंबर 14 राजहाट में है। जहां पैतृक घर में गोपाल कुमार के पिता राजकुमार गुप्ता को एक कमरा मिला है, जिसमें ताला लगा रहता है। एक वर्ष पूर्व 14 जून 2025 में जब राजकुमार गुप्ता के पिता की मृत्यु हुई थी, तब वे सपरिवार यहां आए थे तथा इंजीनियर गोपाल कुमार ने अपने दादा का क्रिया कर्म अन्य परिवार के लोगों के साथ मिलकर किया था।
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इंजीनियर गोपाल कुमार।
केरोसिन बेचकर भाई ने पढ़ाया
इंजीनियर गोपाल कुमार को इंजीनियर बनाने में उनके पिता से ज्यादा छोटे भाई चंदन कुमार गुप्ता का योगदान रहा है। केरोसिन तेल बेचकर उन्होंने अपने भाई को पढ़ाकर इंजीनियर बनाया लेकिन वह भाई आज पटना में कपड़ा दुकान चलाकर अपनी जीविका चला रहा है।
पिता राज कुमार गुप्ता भवन निर्माण विभाग में साधारण पद पर कार्यरत थे। राजकुमार गुप्ता पांच भाइयों में सबसे बड़े हैं। अन्य भाइयों में दूसरे नंबर पर वीरेन्द्र गुप्ता हैं जो नगर परिषद में जन वितरण प्रणाली के विक्रेता हैं।
एक भाई हैं लापता
तीसरे भाई ओमप्रकाश गुप्ता हैं जो हजारीबाग में जीवन बीमा निगम में मैनेजर के पद पर थे परन्तु लंबे समय से लापता हैं। इसके अतिरिक्त जय प्रकाश गुप्ता व पवन गप्ता बेरोजगार की जिंदगी जी रहे हैं। राजहाट के पैतृक घर में सभी पांच भाई को एक एक कमरा मिला है। इंजीनियर गोपाल कुमार की पत्नी भी इंजीनियर है परन्तु वह इस्तीफा देकर गृहिणी बन गई है।
बनमनखी स्थित पैतृक घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। यह सुनकर कि उसके पास से आय से अधिक संपत्ति मिली है सभी सुनकर हैरान हैं। उनके घर से नोटों की गड्डी मिली। उनके बेड से बड़ी संख्या में नोटों की गड्डी मिली इंजीनियर के एक चाचा जविप्र विक्रेता वीरेन्द्र गुप्ता के बच्चों ने अपनी मेहनत से बनमनखी में एक मोबाइल दुकान खोल रखा है जिसे मेहनत से वे चला रहे हैं। इंजीनियर गोपाल कुमार ने अपने परिवार के सदस्यों को कभी न तो देखा और न कभी उसकी आर्थिक मदद ही किया है।
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