उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक्सप्रेसवे और सड़क परियोजनाएं राजनीतिक बहस का नया केंद्र बनती दिख रही हैं। खासकर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है। हालिया बारिश के बाद कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ने, गिट्टी अलग होने और जलभराव की शिकायतें सामने आई हैं। एनएचएआई की ओर से कुछ हिस्सों में मरम्मत और निगरानी का काम किया जा रहा है।
मामला सिर्फ सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है। विपक्ष इसे सरकार के बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों के दावों से जोड़कर जनता के बीच मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने चुनौती है कि बारिश से प्रभावित हिस्सों की तकनीकी जांच, जल निकासी की व्यवस्था और मरम्मत को जल्द पूरा कर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए। हाल में IIT खड़गपुर की टीम ने भी एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया और कुछ हिस्सों में सड़क के नीचे नमी तथा ड्रेनेज से जुड़ी कमियां दर्ज कीं।
चुनावी नजरिए से देखें तो एक्सप्रेसवे केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि विकास और सरकारी कामकाज की गुणवत्ता का प्रतीक भी बन सकते हैं। ऐसे में सड़क की स्थिति, मरम्मत की गति और सरकार की ओर से उठाए गए कदम आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।
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