तहसीलों में रिश्वत राज पर भड़की युवा विकास समिति

– दस साल से जमे लेखपालों को हटाने की मांग
– डीएम को ज्ञापन देने के लिए खड़े समिति के पदाधिकारी।
फतेहपुर। जनपद की तहसीलों में फैले कथित भ्रष्टाचार, बिचौलियों के बढ़ते दखल और वर्षों से एक ही स्थान पर जमे लेखपालों के खिलाफ सोमवार को युवा विकास समिति ने मोर्चा खोल दिया। समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। समिति ने आरोप लगाया कि तहसीलों में आम जनता के छोटे-छोटे काम भी बिना सुविधा शुल्क के नहीं हो रहे हैं। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, वरासत, पैमाइश और नामांतरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए लोगों को महीनों दौड़ाया जाता है, जबकि बिचौलियों के जरिए पहुंचने वालों की फाइलें आसानी से निस्तारित हो जाती हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना था कि तहसील परिसर अब जनसेवा केंद्र कम और दलालों का अड्डा ज्यादा नजर आने लगे हैं। सरकारी कर्मचारियों से पहले बिचौलियों का सामना होता है, जो खुलेआम काम कराने के नाम पर रकम तय करते हैं। आरोप लगाया गया कि बिना रिश्वत दिए आम फरियादी की सुनवाई तक नहीं होती। युवा विकास समिति ने ज्ञापन में सबसे बड़ा मुद्दा तहसीलों में वर्षों से तैनात लेखपालों का उठाया। समिति का कहना है कि शासन की स्थानांतरण नीति के बावजूद कई लेखपाल करीब एक दशक से एक ही क्षेत्र में जमे हुए हैं। लंबे समय तक एक स्थान पर तैनाती के चलते उनकी स्थानीय प्रभावशाली लोगों और बिचौलियों से सांठगांठ मजबूत हो गई है, जिससे राजस्व संबंधी कामों में पारदर्शिता खत्म होती जा रही है। समिति ने आरोप लगाया कि यही कारण है कि नामांतरण, पैमाइश, वरासत और खतौनी संबंधी कार्यों में मनमानी चरम पर है और आम किसान-ग्रामीण सबसे ज्यादा परेशान हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार द्वारा लागू जनहित गारंटी अधिनियम का तहसीलों में खुला मजाक उड़ाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा में कार्य न होने से फरियादी लगातार चक्कर काट रहे हैं। कई मामलों में महीनों बीत जाने के बाद भी निस्तारण नहीं हो रहा, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। समिति ने जिलाधिकारी से मांग की कि लंबे समय से एक ही जगह जमे लेखपालों का तत्काल स्थानांतरण किया जाए, भ्रष्ट कर्मचारियों की जांच कर सख्त कार्रवाई हो तथा तहसील परिसरों से बिचौलियों के नेटवर्क को खत्म किया जाए। यदि 15 दिनों के भीतर प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो जिले की सभी तहसीलों में चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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