खागा, फतेहपुर। ऐरायां विकासखंड की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि कुछ ग्राम प्रधान काम अधूरा होने के बावजूद सचिवों पर भुगतान कराने का दबाव बना रहे हैं। इतना ही नहीं, सामान एक फर्म से खरीदने के बाद भुगतान के लिए किसी दूसरी फर्म का बिल प्रस्तुत किए जाने का मामला भी सामने आया है। इस कथित मनमानी से ब्लॉक के सचिवों में नाराजगी है और फर्म संचालक भी परेशान बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ ग्राम प्रधान पहले सामान मंगवा लेते हैं, लेकिन संबंधित सचिव को इसकी जानकारी नहीं देते। जब भुगतान की बारी आती है तो दूसरी फर्म का बिल लगाकर भुगतान कराने का दबाव बनाया जाता है। इससे वास्तविक आपूर्तिकर्ता और बिल प्रस्तुत करने वाली फर्म के बीच भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
सचिवों का कहना है कि नियमानुसार जिस फर्म से सामग्री खरीदी जाए, उसकी जानकारी पहले से होनी चाहिए, ताकि अभिलेखों का मिलान कर नियमानुसार भुगतान किया जा सके। नाम न छापने की शर्त पर एक सचिव ने बताया कि जब तक विकास कार्य पूरा नहीं होगा और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होंगी, तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा। किसी भी प्रकार की सिफारिश या दबाव में आकर अधूरे काम का भुगतान स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान से पहले मौके पर कराए गए कार्यों की गुणवत्ता और पूर्णता की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
सचिवों ने भी स्पष्ट किया है कि यदि नियमों के विपरीत भुगतान कराने का दबाव बनाया गया तो मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की जाएगी। अब सवाल यह है कि विकास कार्यों के नाम पर बिलों और भुगतान में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जिम्मेदार अधिकारी कब जांच कराएंगे और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?
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