तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में आयोजित एक मीडिया सम्मेलन के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत और उत्तर भारत की धार्मिक परंपराओं में अंतर है तथा इसी वजह से राजनीतिक परिस्थितियां भी अलग दिखाई देती हैं। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर भगवान राम को अपने राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ने का आरोप लगाया और पार्टी को अमीरों की पार्टी बताया।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि दक्षिण भारत में शिव भक्ति की परंपरा अधिक मजबूत रही है, जबकि उत्तर भारत में भगवान राम के प्रति विशेष आस्था देखने को मिलती है। उन्होंने कांग्रेस के दक्षिण भारत में बेहतर प्रदर्शन और उत्तर भारत में अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति को सांस्कृतिक और धार्मिक कारणों से जोड़ा।
मुख्यमंत्री के बयान पर भाजपा नेताओं ने प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने कहा कि भगवान राम और भगवान शिव को क्षेत्रीय आधार पर नहीं बांटना चाहिए। उन्होंने तेलंगाना के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों वेमुलावाड़ा और भद्राचलम का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों परंपराएं पूरे देश की साझा आस्था का हिस्सा हैं।
इससे पहले भी कांग्रेस नेताओं की ओर से भगवान शिव और धार्मिक विषयों को लेकर बयान सामने आते रहे हैं। वर्ष 2017 में राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव के दौरान स्वयं को शिव भक्त बताया था। वहीं, 2024 में लोकसभा में उन्होंने भगवान शिव के संदेश का उल्लेख करते हुए अपने विचार रखे थे।
रेवंत रेड्डी का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
बयान के बाद उत्तर-दक्षिण राजनीति पर चर्चा तेज
रेवंत रेड्डी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच धार्मिक प्रतीकों और उत्तर-दक्षिण राजनीतिक अंतर को लेकर बहस तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि भगवान राम और भगवान शिव को क्षेत्रीय या राजनीतिक आधार पर अलग-अलग देखने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने कहा कि तेलंगाना में वेमुलावाड़ा को ‘दक्षिण काशी’ और भद्राचलम को ‘दक्षिण अयोध्या’ के रूप में जाना जाता है। उनके मुताबिक, ऐसे राज्य के मुख्यमंत्री को धार्मिक विषयों पर बयान देते समय जिम्मेदारी बरतनी चाहिए। उन्होंने रेवंत रेड्डी पर भगवान राम और शिव के बीच राजनीतिक विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया।
‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ का मुद्दा भी उठा
रिपोर्टों के मुताबिक, रेवंत रेड्डी ने भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में ‘जय श्री राम’ के नारे के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाया जाता। उन्होंने दोनों देवताओं को भारतीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए अपने भाषण में राम और शिव की राजनीतिक प्रस्तुति की तुलना की।
परिसीमन को लेकर भी रेवंत रेड्डी ने चिंता जताई
मीडिया सम्मेलन में रेवंत रेड्डी ने केवल धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर ही बात नहीं की। उन्होंने लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े संभावित प्रभावों का भी मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के अनुसार, उनका कहना था कि आबादी को आधार बनाने वाली व्यवस्था से दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
भाजपा ने धार्मिक स्थलों का उदाहरण देकर जवाब दिया
भाजपा की ओर से कहा गया कि भगवान शिव और भगवान राम की आस्था किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बंदी संजय कुमार ने तेलंगाना के ही प्रमुख धार्मिक स्थलों का उदाहरण देते हुए रेवंत रेड्डी की उत्तर और दक्षिण भारत को अलग धार्मिक पहचान से जोड़ने वाली टिप्पणी पर सवाल उठाया।
इस पूरे मामले में एक तरफ रेवंत रेड्डी के बयान को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस सामने आई है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल और उत्तर-दक्षिण राजनीतिक संबंधों को लेकर चर्चा भी तेज हुई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है।
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