मुंबई। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान स्थानीय चुनाव अधिकारियों की भूमिका और ECINet सॉफ्टवेयर में उनके अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग को पत्र भेजकर ERO यानी Electoral Registration Officer को कुछ मामलों में ज्यादा अधिकार देने और सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग की थी।
चोकलिंगम ने सुझाव दिया था कि मतदाता रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर हर मामले में एक जैसी प्रक्रिया लागू करने के बजाय ERO को परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की सुविधा मिलनी चाहिए। ERO यह तय कर सकें कि किस मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना है, कौन से दस्तावेज जरूरी हैं और किन मामलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है।
कमजोर वर्ग के मतदाताओं के लिए सुनवाई की प्रक्रिया में बदलाव का सुझाव
महाराष्ट्र CEO ने विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य कमजोर वर्गों के मतदाताओं का जिक्र किया। उनके मुताबिक, ऐसे मतदाताओं को हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं होना चाहिए। ERO को मामले की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने का विकल्प मिलना चाहिए।
26 सितंबर को दिल्ली में हुई चुनाव आयोग की बैठक में इन सुझावों और आपत्तियों पर चर्चा के बाद कुछ बदलावों पर फैसला लिया गया।
अब सामान्य तौर पर ऐसे मतदाताओं को ERO या AERO के सामने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा, जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं या रिकॉर्ड में जानकारी संबंधी गड़बड़ी है। BLO घर जाकर जरूरी दस्तावेज लेगा और उन्हें ECINet पर अपलोड करेगा। केवल अपवाद वाले मामलों में ERO सुनवाई जरूरी होने का फैसला कर सकेगा। संभव होने पर सुनवाई ऑनलाइन भी कराई जाएगी।
दस्तावेजों को लेकर भी ERO की भूमिका पर चर्चा
महाराष्ट्र CEO ने ERO को मामले की जरूरत के अनुसार दस्तावेज स्वीकार करने की सुविधा देने की मांग की थी। आयोग के अनुसार, BLO संबंधित मतदाता से दस्तावेज लेकर ECINet पर अपलोड करेंगे और ERO उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेगा।
हालांकि, आयोग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ERO तय सूची से अलग किसी अन्य दस्तावेज को स्वतंत्र रूप से स्वीकार कर सकेंगे या नहीं।
ECINet सॉफ्टवेयर में बदलाव के लिए बनी कमेटी
ECINet में स्थानीय अधिकारियों को उनके कानूनी अधिकारों के मुताबिक काम करने की सुविधा देने के मुद्दे पर भी बदलाव की तैयारी है। चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त करेंगे और इसमें IIT या IIIT के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
आयोग ने संकेत दिया है कि यदि फील्ड अधिकारियों को कामकाज में अधिक लचीलापन देने की जरूरत महसूस होती है तो सॉफ्टवेयर में उसके अनुरूप व्यवस्था की जाएगी।
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 21.1% की कमी
महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया जारी है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब 21.1% कम हुई थी। फिलहाल ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी की जानी है।
इसी प्रक्रिया के दौरान मतदाता रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की जांच और संबंधित मतदाताओं को नोटिस देने का काम भी जारी है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की भी चर्चा
ECINet और मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कई बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
इन आपत्तियों में SIR, वोटर लिस्ट और ECINet से जुड़े फैसले शामिल बताए गए। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों का तर्क था कि मतदाता सूची से जुड़े कानूनी अधिकार ERO, जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास हैं, इसलिए ECINet में भी उन्हें अपने अधिकारों के अनुरूप काम करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामले पर सुनवाई प्रस्तावित
चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है। मामला CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने रखा गया है।
याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में चुनाव आयोग के फैसलों को कानून के अनुरूप सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है।
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