*संवाददाता* *सैयद समीर हुसैन*
मुंब्रा: मुंब्रा में बढ़ते नशे के मामलों को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। खासकर कम उम्र के बच्चों और किशोरों में सिगरेट व अन्य नशीले पदार्थों की बढ़ती लत ने अभिभावकों और समाज की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि 10 से 15 वर्ष तक के कई बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिसका असर उनके भविष्य के साथ-साथ समाज के माहौल पर भी पड़ रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए मुंब्रा पुलिस स्टेशन की एनडीपीएस (NDPS) टीम ने नशा करने वालों और नशा बेचने वालों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है। पुलिस अधिकारी विनायक माने के नेतृत्व में टीम देर रात तक मुंब्रा की गलियों और संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। इस अभियान से नशे का कारोबार करने वालों और नशा करने वालों में हड़कंप का माहौल है। पुलिस अधिकारी विनायक माने ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अनिल शिंदे के निर्देश पर एनडीपीएस टीम पूरी सक्रियता के साथ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि मुंब्रा के युवाओं को नशे जैसी खतरनाक लत से बचाने के लिए पुलिस पूरी गंभीरता से काम कर रही है। नशे का कारोबार करने वालों और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बिना किसी दबाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस पूरे मुद्दे पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि क्या नशे पर नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल पुलिस प्रशासन की है? विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की गतिविधियों पर नज़र रखना, उन्हें सही मार्गदर्शन देना और गलत संगत से दूर रखना सबसे पहले अभिभावकों की जिम्मेदारी है। समाज, स्कूल और परिवार यदि मिलकर प्रयास करें, तभी इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
पुलिस का अभियान निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन नशे जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए जनजागरूकता, अभिभावकों की सतर्कता और समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। तभी आने वाली पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकेगा।
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