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*महीनों बाद एक्शन में दिखे वन विभाग के सर्कल ऑफिसर एस.एस. मोरे, सर्वे नंबर 115 पर चला हथौड़ा।*

*संवाददाता: सैयद समीर हुसैन*

*मुंब्रा* के कालसेखर क्षेत्र स्थित वन विभाग की भूमि सर्वे नंबर 115 पर शुक्रवार 23 मई 2026 को वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को हथौड़ों की भेट दी। यह कार्रवाई मुंब्रा-कलवा सर्कल ऑफिसर संदीप सीताराम मोरे (एस.एस. मोरे) के नेतृत्व में की गई। जानकारी के अनुसार शाम करीब 4 बजे सर्कल ऑफिसर एस.एस. मोरे अपने स्टाफ के साथ मौके पर सर्वे करने पहुंचे थे। जांच के दौरान वहां एक कमरे का अवैध निर्माण और कुछ चॉल निर्माण के लिए डाला गया फाउंडेशन मिला। वन भूमि पर हो रहे इस अतिक्रमण को देखते ही अधिकारी मोरे ने तुरंत तोड़ू कार्रवाई शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले इसी जगह पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत गोटेघर वन विभाग कार्यालय में की गई थी। उस समय क्षेत्रीय वन अधिकारी देशमुख द्वारा यह रिपोर्ट दी गई थी कि संबंधित भूमि सर्वे नंबर 115 के अंतर्गत नहीं आती। यह रिपोर्ट ठाणे आरएफओ नरेंद्र मूठे को भेजी गई थी, जिसके बाद कथित भू-माफियाओं के हौसले बढ़ गए और निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने के बाद ड्यूटी पर लौटे सर्कल ऑफिसर संदीप सीताराम मोरे ने वन विभाग के सैटेलाइट सिस्टम और केएमएल मैपिंग तकनीक के जरिए मौके की जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि निर्माण कार्य वन भूमि के अंतर्गत ही किया जा रहा था। इसके बाद मोरे ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई के दौरान निर्माणकर्ता अकबर अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और अधिकारी मोरे से बहस करने लगा। अकबर ने दावा किया कि उसके पास 7/12 दस्तावेज मौजूद हैं और बिना आदेश कार्रवाई कैसे की जा रही है। इस पर एस.एस. मोरे ने उससे दस्तावेज मांगे, लेकिन मौके पर कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए जा सके। शायद अवैध निर्माण करता अकबर और उसके साथियों को भी पता है के वन विभाग की किसी भी भूमि पर सिर्फ 7/12 होना काफी नहीं, वहां किसी भी तरह का कोई निर्माण करने के लिए टीएमसी और वन विभाग की अनुमति पत्र की आवश्यकता होती है जिसे एनओसी कहते है, 1.एन ए प्लान, 2.ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट, 3. डेवलपमेंट प्लान रिमार्क, 4.टीएमसी एनवायरनमेंट,5. क्लियरेशन फॉरेस्ट एनओसी, इसके बाद आपको निर्माण कार्य की अनुमति दी जाएगी, पर निर्माण करता अकबर और उसके कुछ साथी जिनमें से एक नाम मार्को भी शामिल है,इनके पास ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई है, अंडर टेबल कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को पैसे खिलाकर ज़बानी अनुमति के अधिकार ये सारे निर्माण किए गए और किए जाते है, अधिकारी मोरे से जबरन बहस करने और झूठे अधिकारी कड़वा करने एक ऑन ड्यूटी अधिकारी से दादा गिरी करने का भी आरोप सामने आया जिसके बाद संदीप सीताराम मोरे ने अकबर को अपने वाहन में बैठाकर कार्यालय ले गए। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी भूमि का 7/12 रिकॉर्ड मौजूद भी हो, तब भी वन भूमि पर निर्माण करने के लिए संबंधित सरकारी अनुमति और फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अनिवार्य होती है। बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाएगा। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारि देशमुख पर कार्रवाई होगी या अवैध अतिक्रमण करने वालों पर संवैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं कलवा, मुंब्रा, शील, माहपे, रबाले और पिंपरी जैसे इलाकों में बढ़ते वन भूमि अतिक्रमण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल वन विभाग की इस कार्रवाई के बाद भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की आगे की जांच ठाणे आरएफओ नरेंद्र मूठे के आदेश पर किए जाने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना ये है के वन विभाग के पर्यावरण को बिगड़ते हुए ऐसे वन भूमि को बेचने के लिए अधिकारी छुट्टी लेकर अपने घरों की ऐसी में सोते रहेंगे या या इन पर कारवाही भी होगी,आखिर वजह क्या है के जब पर्यावरण बचाने की बात आती है तो वन अधिकारी छुट्टी पर चले जाते है,कही ये भूमाफिया और वन विभाग के अधिकारीओ की आपसी मिली भगत तो नहीं, ये जांच का विषय है,पर कब होगी जांच ये कहा नहीं जा सकता।फिलहाल आरएफओ नरेंद्र मूठे के ऊपर सबकी नज़र बनी हुई है। क्या पर्यावरण और वन भूमि को बचाने के लिए नरेंद्र मूठे एक्शन लेंगे ?।

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