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आईफोन की 20 साल की कहानी: ट्रेडमार्क विवाद से दुनिया के सबसे लोकप्रिय स्मार्टफोन तक, अब नए दौर की तैयारी

नई दिल्ली। एपल का नया लॉन्चिंग इवेंट बुधवार देर रात होने वाला है। कंपनी इस दौरान आईफोन की नई सीरीज पेश कर सकती है। नए मॉडल बाजार में आने से पहले आईफोन की करीब दो दशक लंबी कहानी पर नजर डालना दिलचस्प है। यह सिर्फ एक स्मार्टफोन की कहानी नहीं, बल्कि मोबाइल तकनीक के पूरी तरह बदलने की कहानी है।

कभी एपल के पास नहीं था ‘आईफोन’ नाम

आज ‘आईफोन’ नाम एपल की पहचान बन चुका है, लेकिन शुरुआत में यह नाम कंपनी के पास नहीं था। अमेरिकी नेटवर्किंग कंपनी सिस्को के पास ‘iPhone’ नाम का ट्रेडमार्क था। एपल ने 2007 में अपना आईफोन लॉन्च किया तो दोनों कंपनियों के बीच कानूनी विवाद भी हुआ।

बाद में दोनों कंपनियों के बीच समझौता हुआ और दोनों को ‘iPhone’ नाम इस्तेमाल करने की अनुमति मिली। सिस्को इससे पहले इंटरनेट और VoIP तकनीक पर आधारित फोन के लिए इस नाम का इस्तेमाल कर चुकी थी।

एक आईफोन की कीमत 142 करोड़ रुपये तक पहुंची

आईफोन की कीमत आम तौर पर प्रीमियम कैटेगरी में रहती है, लेकिन एक कस्टम मॉडल की कीमत ने सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। ब्रिटिश डिजाइनर स्टुअर्ट ह्यूज ने एक आईफोन को बेहद खास तरीके से तैयार किया था।

इस फोन में करीब 135 ग्राम 24 कैरेट सोना और 600 सफेद हीरे लगाए गए थे। होम बटन की जगह 24 कैरेट का काला हीरा लगाया गया। यह कस्टम आईफोन करीब 1.5 करोड़ डॉलर यानी मौजूदा भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 142 करोड़ रुपये में बिका था।

2007 में बदला फोन इस्तेमाल करने का तरीका

9 जनवरी 2007 को सैन फ्रांसिस्को में स्टीव जॉब्स ने दुनिया के सामने पहला आईफोन पेश किया। उन्होंने इसे तीन डिवाइस के मेल के तौर पर बताया था—मोबाइल फोन, टचस्क्रीन वाला आईपॉड और इंटरनेट कम्युनिकेशन डिवाइस।

उस समय आईफोन में न 5G था, न ऐप स्टोर, न फेस आईडी और न ही आज जैसी AI तकनीक। इसके बावजूद 3.5 इंच की टचस्क्रीन ने मोबाइल इस्तेमाल करने का तरीका बदल दिया।

फोन में फिजिकल कीपैड की जगह स्क्रीन का इस्तेमाल किया गया। टैप, स्वाइप और पिंच जैसे जेस्चर से फोन चलने लगा।

इंटरनेट ब्राउजिंग में भी आया बड़ा बदलाव

उस दौर में ज्यादातर मोबाइल फोन पर इंटरनेट का अनुभव सीमित था। वेबसाइटें मोबाइल स्क्रीन के हिसाब से काफी साधारण और कटी-फटी नजर आती थीं।

आईफोन के सफारी ब्राउजर ने मोबाइल पर वेब ब्राउजिंग का अनुभव बदल दिया। यूजर मोबाइल स्क्रीन पर वेबसाइटों को कंप्यूटर के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से देख सकते थे।

पहला आईफोन जून 2007 में बिक्री के लिए आया और महज 74 दिनों में इसकी 10 लाख यूनिट बिक गईं।

सीक्रेट प्रोजेक्ट से सामने आया था आईफोन

आईफोन की शुरुआत भी किसी सामान्य प्रोडक्ट की तरह नहीं हुई थी। 2004-05 के दौरान एपल के कुछ चुनिंदा इंजीनियर अचानक अपने नियमित प्रोजेक्ट से अलग हो गए।

उन्हें कूपर्टीनो में एक अलग और बेहद गोपनीय लैब में भेजा गया था। इस प्रोजेक्ट का कोडनेम ‘पर्पल’ था। यहां इंजीनियर लगातार फोन के नए डिजाइन और तकनीक पर काम कर रहे थे।

करीब ढाई साल तक इस प्रोजेक्ट को बेहद गोपनीय रखा गया। 2007 में जब स्टीव जॉब्स ने आईफोन पेश किया, तब दुनिया को पता चला कि इन इंजीनियरों की टीम किस बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी।

आईफोन 3G के साथ आया ऐप स्टोर

पहले आईफोन की बड़ी कमी यह थी कि उसमें ऐप स्टोर नहीं था। 2008 में आईफोन 3G के साथ ऐप स्टोर की शुरुआत हुई।

शुरुआत में इसमें 800 से ज्यादा ऐप उपलब्ध थे। अब डेवलपर्स आईफोन के लिए अपने ऐप तैयार कर सकते थे और यूजर उन्हें डाउनलोड कर सकते थे।

पहले आईफोन को 10 लाख यूनिट बेचने में 74 दिन लगे थे, जबकि आईफोन 3G ने यह आंकड़ा सिर्फ तीन दिन में हासिल कर लिया।

आईफोन 4 ने स्क्रीन और कैमरे को बनाया बेहतर

2010 में आईफोन 4 के साथ रेटिना डिस्प्ले पेश किया गया। 3.5 इंच की स्क्रीन में 960×640 पिक्सल का रिजॉल्यूशन और करीब 326 पिक्सल प्रति इंच की डेंसिटी थी।

इस मॉडल में 5 मेगापिक्सल कैमरा, HD वीडियो रिकॉर्डिंग और वीडियो कॉलिंग के लिए फेसटाइम जैसे फीचर भी आए। लॉन्च के शुरुआती तीन दिनों में इसकी करीब 17 लाख यूनिट बिक गईं।

स्टीव जॉब्स के बाद टिम कुक का दौर

2011 में स्टीव जॉब्स ने CEO पद से इस्तीफा दिया और कुछ समय बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद टिम कुक ने कंपनी की कमान संभाली।

कुक के दौर में आईफोन को ज्यादा बड़े बाजार तक पहुंचाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। 2014 में आईफोन 6 और आईफोन 6 प्लस के साथ बड़े डिस्प्ले वाले मॉडल पेश किए गए। इसी दौर में एपल पे ने आईफोन को डिजिटल भुगतान से भी जोड़ा।

आईफोन X ने हटाया होम बटन

2017 में आईफोन की दसवीं सालगिरह पर आईफोन X लॉन्च हुआ। इसमें पहली बार होम बटन को हटाकर लगभग पूरी फ्रंट स्क्रीन को डिस्प्ले में बदल दिया गया।

इसके साथ फेस आईडी पेश हुआ। TrueDepth कैमरा चेहरे का 3D मैप तैयार करके फोन को सुरक्षित तरीके से अनलॉक करता था।

इसके बाद आईफोन की पहचान में कैमरा भी तेजी से महत्वपूर्ण होता गया। 2019 के आईफोन 11 में नाइट मोड और अल्ट्रा वाइड कैमरा जैसे फीचर आए।

5G से सैटेलाइट और USB-C तक पहुंचा आईफोन

2020 में आईफोन 12 के साथ एपल ने 5G की शुरुआत की। A14 बायोनिक चिप और 16-कोर न्यूरल इंजन ने फोन की प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग क्षमताओं को मजबूत किया।

2022 में आईफोन 14 के साथ इमरजेंसी SOS वाया सैटेलाइट पेश किया गया। मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई उपलब्ध न होने की स्थिति में भी इमरजेंसी मैसेज भेजने की सुविधा मिली।

2023 में आईफोन 15 के साथ लाइटनिंग पोर्ट की जगह USB-C दिया गया। वहीं आईफोन 15 प्रो में टाइटेनियम बॉडी और A17 प्रो चिप ने इसे और ताकतवर बनाया।

2024 में आईफोन 16 सीरीज के साथ एपल इंटेलिजेंस की शुरुआत हुई। A18 चिप और कैमरा कंट्रोल जैसे फीचर भी इस पीढ़ी का हिस्सा बने।

2025 में आईफोन 17 सीरीज के साथ आईफोन एयर पेश किया गया, जिसकी मोटाई करीब 5.6 मिलीमीटर बताई गई। इससे साफ हुआ कि एपल कम जगह में ज्यादा तकनीक फिट करने पर भी जोर दे रहा है।

अब आईफोन के सामने AI और इनोवेशन की चुनौती

आईफोन की यात्रा अब एक ऐसे दौर में पहुंच चुकी है, जहां स्मार्टफोन बाजार में AI सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा बन चुका है। आने वाले समय में एपल के सामने AI क्षमताओं को बेहतर करने, नए हार्डवेयर इनोवेशन लाने और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने जैसी चुनौतियां होंगी।

इसके अलावा कंपनी को अमेरिका और यूरोप में बढ़ती रेगुलेटरी जांच तथा चीन पर मैन्युफैक्चरिंग निर्भरता कम करने जैसे मुद्दों से भी निपटना होगा।

करीब दो दशक में आईफोन ने मोबाइल फोन को सिर्फ कॉल और मैसेज करने वाले डिवाइस से बदलकर एक शक्तिशाली कंप्यूटिंग डिवाइस बना दिया है। अब आने वाली पीढ़ियों से उम्मीद यही होगी कि आईफोन एक बार फिर स्मार्टफोन की दुनिया में कोई बड़ा बदलाव लेकर आए।

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