नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे के बाद नगर निगम (MCD) ने शहरभर में इमारतों की सुरक्षा जांच कराने का फैसला लिया है। MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने क्षेत्र में इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
MCD की ओर से जुटाई जाने वाली जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले हलफनामे में भी शामिल किया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।
27.84 लाख इमारतों का हुआ था सर्वे
MCD के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में राजधानी में बड़े स्तर पर इमारतों का सर्वे कराया गया था। इस दौरान 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों की जांच की गई थी। इनमें केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था।
अब सत्य निकेतन हादसे के बाद एक बार फिर व्यापक स्तर पर जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि कहीं पुरानी, जर्जर या अतिरिक्त मंजिलों का भार झेल रही इमारतें लोगों के लिए खतरा तो नहीं बन रही हैं।
हादसे में 7 लोगों की मौत
सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए करीब 28 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। राहत एवं बचाव दल ने मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला। तीन घायलों की हालत गंभीर बताई गई।
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान अभिषेक कुमार, अर्पित जाज, युवराज सोनी, पवन कुमार, सुरेंद्र सिंह, अक्षत सिंह और परम लाल कोरी के रूप में हुई है।
पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मकानों का इस्तेमाल पीजी के तौर पर किया जा रहा है। इलाके में पिछले कई वर्षों में आवासीय मकानों का व्यावसायिक इस्तेमाल भी बढ़ा है।
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की कई पुरानी इमारतें जिस मूल ढांचे के आधार पर बनाई गई थीं, उनमें बाद में अतिरिक्त मंजिलें या दूसरे निर्माण किए गए। ऐसे में इमारत की वास्तविक क्षमता और उस पर पड़े अतिरिक्त भार की जांच जरूरी है।
MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई
हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत चार इंजीनियरिंग अधिकारियों को निलंबित किया है। साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को सौंपा गया है।
MCD की नई जांच के बाद अब राजधानी में ऐसी इमारतों की पहचान पर जोर रहेगा, जो जर्जर स्थिति में हैं या जिनमें बिना पर्याप्त सुरक्षा जांच के अतिरिक्त निर्माण किया गया है।
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