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नेपाल में बाढ़ के 14 दिन बाद भी राहत अभियान जारी, 7 हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश

काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के करीब दो सप्ताह बाद भी राहत एवं बचाव अभियान जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में तबाही, टूटे हुए रास्तों और भारी मलबे के बीच रेस्क्यू टीमें सात हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। अब तक 13 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि करीब 4,894 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में अब तक 1,356 लोगों की मौत की सूचना है। लापता लोगों में 587 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत एवं बचाव टीमों को दुर्गम पहाड़ी इलाकों और सुरंगों में जमा मलबे के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 6 लोग फंसे

चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की करीब 250 मीटर लंबी सुरंग में छह लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्हें बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना की 35 सदस्यीय टीम, नेपाली सेना और अन्य बचाव दल संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं।

रेस्क्यू टीम सुरंग के अंदर करीब 130 मीटर तक पहुंच चुकी है। परियोजना में मौजूद 71 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने और पूरे अभियान को पूरा करने में तीन से चार दिन और लग सकते हैं।

सात हाइड्रोपावर परियोजनाओं में तलाश

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सात हाइड्रोपावर परियोजनाओं में सर्च एवं रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।

  • लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
  • चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट: नेपाली और भारतीय सेना की टीम सुरंग के भीतर 115 मीटर से अधिक तक पहुंच चुकी है।
  • अपर त्रिशूली-1: सुरंग में करीब 400 मीटर अंदर तक तलाशी ली गई, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला।
  • मेलुंग खोला: करीब एक किलोमीटर के क्षेत्र में ड्रोन की मदद से तलाश की जा रही है।
  • त्रिशूली-3A: सुरंग और पावर हाउस में खोज अभियान जारी है।
  • त्रिशूली-3B: ड्रोन और थर्मल कैमरों से कार्यालय और आवासीय परिसर के आसपास तलाशी ली जा रही है।
  • अन्य प्रभावित परियोजनाओं: मलबे और क्षतिग्रस्त रास्तों को हटाकर रेस्क्यू टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने का प्रयास जारी है।

लापता लोगों के परिजनों से DNA सैंपल मांगे

तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद कुछ भारतीय नागरिकों के अब भी लापता होने की सूचना है। लापता भारतीयों के परिजनों से DNA सैंपल उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि बरामद शवों की पहचान में मदद मिल सके।

नेपाल ने जलवायु नुकसान के लिए मांगा मुआवजा

नेपाल ने बाढ़ और जलवायु आपदा से हुए नुकसान के लिए करीब 2 करोड़ डॉलर यानी लगभग 189 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। नेपाल का कहना है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उसका योगदान बेहद कम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर देश पर तेजी से पड़ रहा है।

नेपाल के मुताबिक, देश के पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान वैश्विक औसत की तुलना में करीब 50 प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में नेपाल के पहाड़ों ने अपनी बर्फ का करीब एक-तिहाई हिस्सा खो दिया है।

राहत अभियान के साथ बढ़ी चुनौतियां

बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह जमा मलबे और कीचड़ के कारण बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। इसके बावजूद नेपाली सेना, भारतीय रेस्क्यू टीम और स्थानीय एजेंसियां सुरंगों तथा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।

लापता लोगों की संख्या करीब पांच हजार होने के कारण राहत एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है। समय बीतने के साथ सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

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