नई दिल्ली। देश में मानसून की गतिविधियां अब कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। मौसम विभाग (IMD) की 8 सितंबर की सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में बादलों की मौजूदगी काफी कम नजर आई है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है, जबकि पूर्वी हिस्सों में अब भी बादलों का जमाव बना हुआ है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बादलों की यह कमी मानसून की गतिविधियों में गिरावट का संकेत है। हालांकि, मानसून की आधिकारिक वापसी अभी शुरू नहीं हुई है। मौसम में हो रहे बदलावों के पीछे समुद्र की सतह के तापमान में बढ़ोतरी और अल नीनो जैसे मौसमी प्रभावों को भी एक कारण माना जा रहा है।
बिहार में 13 जिलों में बाढ़, 27 लाख लोग प्रभावित
बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत की सूचना है।
नदी किनारे बसे गांवों में पानी घुसने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र के अंबोली में भारी बारिश
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के अंबोली क्षेत्र में इस मानसून सीजन में बेहद भारी बारिश दर्ज की गई है। यहां अगस्त तक 250 इंच से अधिक बारिश होने की बात सामने आई है। सितंबर के अंत तक बारिश का आंकड़ा 400 इंच तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
पहाड़ी राज्यों में बारिश और भूस्खलन का असर
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है। कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी है।
कुल मिलाकर देश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ रही है, लेकिन बिहार समेत पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का संकट अभी बना हुआ है। आने वाले दिनों में मौसम विभाग की निगरानी और स्थानीय प्रशासन की तैयारियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
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