काठमांडू। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक 97 वर्षीय महिला के चार घंटे तक मलबे में दबे रहने और जीवित बचाए जाने की घटना ने सभी को भावुक कर दिया। वहीं, नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1252 पहुंच गई है, जबकि 4875 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के दौरान नुवाकोट के देविघाट क्षेत्र में नदी किनारे स्थित एक बुजुर्ग देखभाल केंद्र भी पानी की चपेट में आ गया। केंद्र की ग्राउंड फ्लोर पर अपने कमरे में मौजूद 97 वर्षीय गुना माया बोहरा तेज बहाव की चपेट में आ गईं और मलबे के बीच फंस गईं।
करीब चार घंटे तक मलबे में दबी रहने के बाद सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। बताया गया कि उनके रिश्तेदार भी जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान में मदद की। महिला को उपचार के लिए काठमांडू के बीर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रेस्क्यू के बाद गुना माया काफी कम बोल रही हैं। होश में आने के बाद वह बार-बार एक ही सवाल पूछ रही हैं—“पानी ने मुझे क्यों मारा?” उनकी यह बात नेपाल में आई इस भयावह त्रासदी की मानवीय पीड़ा को बयां कर रही है।
4875 लोग अब भी लापता
नेपाल पुलिस के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत और बचाव अभियान जारी है। कई इलाकों से शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1252 हो गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और नुवाकोट शामिल हैं।
लापता लोगों की तलाश के लिए सेना, पुलिस और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। भोटेकोशी नदी के आसपास के क्षेत्रों और अंडरग्राउंड पावरहाउस की सुरंगों में भी फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
सड़कें और पुल बहने से बढ़ी मुश्किलें
बाढ़ की वजह से नेपाल के कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। बिदुर क्षेत्र में नेपाली सेना ने करीब 250 मीटर लंबी अस्थायी केबल क्रॉसिंग लगाई है, जिसके सहारे बाढ़ प्रभावित लोगों को तेज बहाव वाली नदी पार कराई जा रही है।
वहीं, धादिंग जिले में भूस्खलन के कारण पृथ्वी हाईवे का यातायात भी प्रभावित हुआ है। यह मार्ग काठमांडू को पोखरा और पश्चिमी नेपाल के कई हिस्सों से जोड़ता है।
तिब्बत में भी नेपाली नागरिकों के लापता होने की सूचना
नेपाल-तिब्बत सीमा से आई बाढ़ के बाद तिब्बत क्षेत्र में करीब 100 नेपाली नागरिकों के लापता होने की भी सूचना सामने आई है। नेपाल सरकार और संबंधित एजेंसियां इन लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
बाढ़ प्रभावित नेपाल की मदद के लिए भारत लगातार राहत सामग्री भेज रहा है। भारत की ओर से जरूरी दवाओं की पांचवीं खेप भी नेपाल पहुंचाई गई है। इस खेप में पांच टन से अधिक आवश्यक दवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा एक विशेष रेस्क्यू टीम और राहत एवं बचाव उपकरण भी भेजे गए हैं। भारत की फोरेंसिक टीम भी शवों की पहचान में स्थानीय एजेंसियों की मदद कर रही है। डीएनए जांच के माध्यम से उन शवों की पहचान की जा रही है, जिनकी पहचान सामान्य तरीकों से संभव नहीं हो पा रही है।
जलवायु परिवर्तन पर भी उठे सवाल
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक खतरों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम, अत्यधिक बारिश और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आपदा पूर्व चेतावनी और राहत व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं, जबकि कई प्रभावित इलाकों में लोगों के सामने भोजन, दवा और सुरक्षित आश्रय की गंभीर समस्या बनी हुई है।
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