सुल्तानपुर घोष/फतेहपुर। ऐरायां विकास खंड की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर घोष में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच स्थायी गौशाला में जलभराव की समस्या सामने आई है। बारिश का पानी गौशाला परिसर में भर जाने से वहां मौजूद गोवंशों के सामने संकट खड़ा हो गया। वहीं गौशाला में रखा भूसा और पशु आहार भी पानी में डूब गया, जिससे व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि गौशाला परिसर में पानी इतना अधिक भर गया कि कुछ गोवंशों के लिए डूबने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। हालात बिगड़ने पर ग्रामीणों ने इसकी सूचना संबंधित जिम्मेदारों को दी। जानकारी मिलते ही कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से गोवंशों को सुरक्षित निकालने का प्रयास शुरू किया गया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान कुछ गोवंशों को गौशाला से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जबकि कई गोवंश स्वयं गेट से बाहर निकल गए। गौशाला से बाहर निकले छुट्टा गोवंश अब आसपास के किसानों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहे हैं। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी करनी पड़ रही है।

तालाब की जमीन पर गौशाला बनाने का आरोप
जलभराव की घटना के बाद ग्रामीणों ने गौशाला के निर्माण स्थल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जिस स्थान पर वर्तमान में स्थायी गौशाला बनी है, वहां पहले से ‘कोड़वा’ नामक तालाब हुआ करता था। उनका कहना है कि पूर्वजों के समय से यह स्थान तालाब के रूप में जाना जाता था और बाद में इसी जगह पर गौशाला का निर्माण कर दिया गया। हालांकि, ग्रामीणों के इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
जल निकासी की व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला निर्माण से पहले यदि स्थल की भौगोलिक स्थिति और बरसात के दौरान होने वाले जलभराव का सही आकलन किया गया होता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। सवाल यह भी उठ रहा है कि बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
बारिश के दौरान गौशाला में पानी भरने से न केवल गोवंशों की सुरक्षा प्रभावित हुई, बल्कि भूसा और पशु आहार के भी खराब होने का खतरा पैदा हो गया। ग्रामीणों ने गौशाला में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
फिलहाल भारी बारिश के बाद गौशाला परिसर में हुए जलभराव ने निर्माण स्थल के चयन, जल निकासी और गोवंशों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित जिम्मेदार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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